देहरादून। उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में वीआईपी संलिप्तताओं और साक्ष्य मिटाने के आरोपों की गहन जांच के लिए राज्य सरकार ने केंद्र को सीबीआई जांच की औपचारिक संस्तुति भेज दी है। इसे कांग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना ने “अंकिता की आत्मा को न्याय दिलाने की लड़ाई का पहला कदम” बताया है, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि बिना सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट की निगरानी के सीबीआई जांच पर किसी को भरोसा नहीं होगा।
एआईसीसी सदस्य और उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने शुक्रवार को यहां जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि पिछले 10 दिनों से अधिक समय से राज्य भर में चल रहे कांग्रेस के आंदोलन का ही यह नतीजा है। “यह संस्तुति अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन असली सफलता तब होगी जब केंद्र इस संस्तुति को स्वीकार करे और सीबीआई जांच को न्यायिक देखरेख में कराए।” उन्होंने जोर देकर कहा कि देश में सीबीआई की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं, इसलिए कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के जज की निगरानी में जांच के आदेश आने तक आंदोलन जारी रखेगी।
मामले की पृष्ठभूमि:
अंकिता भंडारी, एक 19 वर्षीय युवती, सितंबर 2022 में ऋषिकेश के एक रिसॉर्ट में लापता हो गई थीं। बाद में उनका शव व्यास घाटी में मिला, जिसके बाद हत्याकांड ने राज्य की राजनीति को हिला दिया। पूर्व मंत्री पुलकित आर्य समेत कई वीआईपी नाम सामने आए, और साक्ष्य मिटाने के आरोप लगे। राज्य पुलिस ने जांच की, लेकिन परिवार और विपक्ष ने सीबीआई जांच की मांग की। सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी इस मामले में हस्तक्षेप किया था, लेकिन अब केंद्र की मंजूरी जरूरी है।धस्माना ने कहा कि यह आंदोलन अंकिता के परिवार और पूरे राज्य की भावनाओं का प्रतीक है। “न्यायिक निगरानी के बिना जांच का कोई मतलब नहीं। कांग्रेस इस लड़ाई को अंत तक लड़ेगी।” प्रदेश कांग्रेस ने देहरादून सहित कई जिलों में धरना, रैलियां और विरोध प्रदर्शन किए, जिसका दबाव सरकार पर पड़ा।
उत्तराखंड सरकार ने शुक्रवार को ही केंद्र को पत्र भेजकर सीबीआई जांच की सिफारिश की, जो आंदोलन के ठीक बाद हुई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पर विपक्ष लगातार दबाव बना रहा है। कांग्रेस का कहना है कि यह कदम आंदोलन की जीत है, लेकिन जांच की प्रगति पर नजर रखी जाएगी।कांग्रेस नेता ने अंत में अपील की कि केंद्र शीघ्र संस्तुति स्वीकार करे और न्यायिक निगरानी सुनिश्चित करे, ताकि अंकिता को सच्चा न्याय मिल सके। मामले पर अब सभी की नजरें केंद्र और कोर्ट पर हैं।

Recent Comments