देहरादून। पूर्व उत्तराखंड कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष एवं CWC सदस्य करन माहरा ने ऊधम सिंह नगर के किसान स्वर्गीय सुखवंत सिंह की काठगोदाम में आत्महत्या को धामी सरकार के ‘सुशासन’ पर सीधा प्रहार बताया है। उन्होंने इसे सिस्टम की बेरुखी, पुलिस-प्रशासन की लापरवाही और सरकारी असंवेदनशीलता का प्रमाण करार दिया।
माहरा ने कहा कि किसान ने मरने से पहले जिन अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए, उन्हीं के अधीन अब जांच का ‘नाटक’ चल रहा है। यह आरोपी की छाया में निष्पक्ष जांच का मजाक है, जहां न्याय की कुर्सी पर ही आरोपी बैठा हो। उन्होंने बड़े-बड़े पोस्टरों और खोखली घोषणाओं के बीच किसानों की मजबूरी पर तंज कसा—यदि शासन संवेदनशील होता तो सुखवंत सिंह को यह कदम न उठाना पड़ता।
यह घटना केवल एक जिले की नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड के सम्मान, संवेदना और किसानों के भविष्य का सवाल है। जनता भरोसा किस आधार पर करे जब सिस्टम ही जांचकर्ता बने? माहरा ने सरकार से तत्काल जांच CBI या बाहरी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपने और आरोपित अधिकारियों को दूर करने की मांग की।
उन्होंने सवाल दागे—क्या किसान की जान इतनी सस्ती है? सत्ता में जवाबदेही बची है? जब तक ईमानदार, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच न हो, सरकार किसानों के साथ नहीं बल्कि दोषियों के पक्ष में खड़ी दिखेगी। यह चुप्पी और दिखावा सुशासन नहीं, असंवेदनशीलता की पराकाष्ठा है।

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