पछवादून डंपर मालिकों का ऐतिहासिक फैसला: विकासनगर में बैठक में दून डंपर जन कल्याण समिति भंग, नई यूनियन की राह पर

देहरादून/विकासनगर। उत्तराखंड के खनन और ट्रांसपोर्ट क्षेत्र में बड़ा उलटफेर!

आज विकासनगर में पछवादून के डंपर मालिकों की महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें सर्वसम्मति से दून डंपर जन कल्याण समिति को पूरी तरह भंग कर दिया गया। बैठक में शामिल ट्रांसपोर्टर्स ने समिति के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए इसे स्थानीय हितों के खिलाफ बताया और खनन विभाग सहित सभी संबंधित विभागों को ज्ञापन भेजकर इस फैसले की औपचारिक जानकारी दी।

बैठक में प्रमुख रूप से अंकित चौहान, विभोर गुप्ता, हाजी माँटू, राशिद, मुनेश कश्यप, गफ़ूर, अभिषेक मौर्य, राहुल सहित पछवादून के दर्जनों डंपर मालिक और ट्रांसपोर्टर्स मौजूद रहे।

ट्रांसपोर्टर्स का कहना है कि समिति के पूर्व अध्यक्ष अनिल कुमार पांडे ने लगातार सौतेला व्यवहार किया, बाहरी राज्यों के क्रशर मालिकों और ट्रांसपोर्टर्स से मिलकर स्थानीय क्रशरों व ट्रांसपोर्टर्स का शोषण किया।

ट्रांसपोर्टर्स ने याद दिलाया कि डेढ़ साल पहले खनन विभाग द्वारा लागू की गई ‘पूर्ण माल, पूर्ण बिल और पूर्ण रवाना’ नीति से अवैध खनन पर लगाम लगी, राज्य का राजस्व रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ा और केंद्र सरकार ने उत्तराखंड को 200 करोड़ रुपये की इनामी राशि दी।

लेकिन कुछ तथाकथित यूनियन पदाधिकारियों को यह सफलता रास नहीं आई और उन्होंने षड्यंत्र रचकर स्थानीय ट्रांसपोर्टर्स के कारोबार को बंद कराने की कोशिश की।

आहत होकर पछवादून के ट्रांसपोर्टर्स ने अब समिति से पूर्ण अलगाव की घोषणा कर दी है।

ज्ञापन में साफ कहा गया है कि आज के बाद समिति के किसी भी निर्णय, ज्ञापन या आदेश में पछवादून के ट्रांसपोर्टर्स शामिल नहीं होंगे। यदि समिति भविष्य में कोई कदम उठाती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी उसके पदाधिकारियों पर होगी।

ट्रांसपोर्टर्स ने ऐलान किया कि वे जल्द ही अपनी अलग, मजबूत और स्थानीय हितों को प्राथमिकता देने वाली नई यूनियन का गठन करेंगे।

इसकी पूरी जानकारी समय रहते खनन विभाग, प्रशासन और मीडिया को दी जाएगी।

यह फैसला खनन क्षेत्र में स्थानीय बनाम बाहरी हितों के टकराव को और उजागर करता है। खनन कारोबार से जुड़े कारोबारी का मानना है कि इससे खनन नीतियों में और पारदर्शिता आ सकती है, लेकिन साथ ही नए विवादों की आशंका भी जताई जा रही है।

प्रशासन की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन पछवादून ट्रांसपोर्टर्स की यह एकजुट आवाज राज्य के खनन उद्योग में बड़े बदलाव का संकेत दे रही है।

खनन निदेशक को भेजा पत्र यँहा देखें

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