गोरखा शेरों का गुस्सा फूट पड़ा! सोशल मीडिया पर ‘विदेशी’ कहने वालों को चकराता में ललकार, पुलिस से FIR की मांग

सोशल मीडिया पर भारतीय गोरखाओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियों से आक्रोश, विधायक प्रीतम सिंह के नेतृत्व में एसएसपी से शिकायत

देहरादून। चकराता क्षेत्र में सोशल मीडिया पर भारतीय गोरखाओं के खिलाफ की जा रही आपत्तिजनक और विवादास्पद टिप्पणियों को लेकर गोरखा समाज में भारी आक्रोश है। इस संबंध में चकराता के गोरखा समाज ने विधायक प्रीतम सिंह के नेतृत्व में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, देहरादून को एक शिकायती पत्र सौंपकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

गोरखा समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि उत्तराखंड में गोरखा समुदाय राज्य निर्माण से पहले से ही सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रसेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता आया है। सेना, अर्धसैनिक बलों और सीमाई सुरक्षा में गोरखा समाज का ऐतिहासिक योगदान रहा है। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर गोरखा समाज को “घुसपैठिया” और “विदेशी” कहे जाने से समाज की भावनाएं आहत हुई हैं और इससे सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचने की आशंका है।

हाल ही में सोशल मीडिया मंचों पर कोटी-कनासर, चकराता क्षेत्र के पूर्व प्रधान राहुल पुन सहित समस्त भारतीय गोरखाओं को विदेशी बताए जाने के आरोप सामने आए हैं, जिससे क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बन गया है। समाज के लोगों का कहना है कि किसी भी भारतीय नागरिक को विदेशी कहना संविधान प्रदत्त समानता और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

इस मामले में दी गई शिकायत में मांग की गई है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और क्षेत्र में शांति एवं भाईचारा बना रहे।

शिकायतकर्ताओं में लालचंद शर्मा, गोदावरी थापली, दीप बोहरा, राहुल पुन (पूर्व प्रधान), पदम छेत्री, मनोज थापा, पदम बिष्ट, हरि बहादुर, राजवीर छेत्री, विकास थापा, धर्मपाल राणा, दिवान थापा, विजय तमांग, रमेश डांगी, कमल थापा, अमित पुन, बाबलू ठाकुर सहित अनेक सामाजिक प्रतिनिधि व स्थानीय नागरिक शामिल हैं।

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