शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के अपमान पर भाजपा-संघ का मौन दुर्भाग्यपूर्ण: धस्माना

प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष धस्माना ने भाजपा के सनातन प्रेम को बताया छलावा

देहरादून: सनातन धर्म व हिंदुत्व का दिन रात राग अलापने वाली भाजपा सरकार देव भूमि उत्तराखंड की पौराणिक धार्मिक यात्रा नंदा राज जात के सफल आयोजन का इंतजाम नहीं करवा पा रही और दूसरी तरफ उत्तरप्रदेश में भारत के चौथे धाम मोक्ष धाम कहलाए जाने वाले बद्रीआश्रम के ज्योर्तिमठ पीठाधीश्वर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद गिरी जी का प्रयागराज माघ मेला स्नान में अपमान व उनके शिष्यों के साथ पुलिस द्वारा धक्का मुक्की गाली गलौच भाजपा और आरएसएस का असली चेहरा बेनकाब कर रहा है।

यह बात आज एआईसीसी सदस्य व उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने अपने ईसी रोड स्थित कैंप कार्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए कही। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में पिछले नौ वर्षों से भाजपा सरकार है और इनके इस कार्यकाल में पहली बार नंदा राज जात यात्रा का आयोजन होना था किंतु बकौल सरकार व नंदा राज जात यात्रा समिति यात्रा की व्यवस्थाएं नहीं हो पाई हैं और खराब मौसम होने की संभावना के चलते यात्रा को स्थगित करने की घोषणा कर दी है जो सरकार की अक्षमता दर्शाती है।

धस्माना ने कहा कि राज्य में भाजपा की सरकार को चार साल पूरे होने जा रहे हैं और यात्रा की व्यवस्थाएं पूरी ना कर पाना शर्मनाक है। श्री धस्माना ने कहा कि पड़ोसी राज्य उत्तरप्रदेश में भी भाजपा सरकार सत्तारूढ़ है और संयोग से वहां के मुख्यमंत्री उत्तराखंड मूल के ही हैं और देश की एक प्रमुख पीठ के पीठाधीश्वर हैं किन्तु रविवार को प्रयागराज माघ मेला में संगम पर स्नान करने पहुंचे ज्योर्तिमठ पीठाधीश्वर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद गिरी जी महाराज के साथ जिस प्रकार का व्यवहार किया गया और उनके शिष्यों को पुलिस ने जिस तरह से गालियां दीं और धक्के दे कर हिरासत में लिया वो शर्मनाक है।

धस्माना ने कहा कि यह दोनों घटनाएं यह साफ साफ बताती हैं कि भाजपा और आरएसएस को सनातन धर्म व हिंदुत्व से कोई लेना देना नहीं है और उनका सनातन धर्म और हिंदुत्व का राग केवल वोट और सत्ता तक सीमित है। धस्माना ने कहा कि उत्तराखंड सरकार को नंदा देवी राज जात यात्रा को समय पर करवाने की व्यवस्थाएं युद्ध स्तर पर करनी चाहिए व उत्तरप्रदेश सरकार को ज्योर्तिमठ पीठाधीश्वर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद गिरी जी से क्षमा याचना करनी चाहिए व उनके साथ दुर्व्यवहार करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही करनी चाहिए।

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