परवाज़े अमन की साहित्यिक नशिस्त में कवियों-शायरों ने बटोरी वाहवाही

कांग्रेस नेता धस्माना ने जावेद अख्तर की नज़्म सुनाकर जमाया रंग

देहरादून। साहित्य व राष्ट्रीय एकता के लिए समर्पित संस्था ‘परवाज़े अमन’ के ओल्ड मसूरी रोड स्थित केंद्रीय कार्यालय में आयोजित मासिक नशिस्त में कवियों व शायरों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। मुख्य अतिथि एआईसीसी सदस्य व उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने मशहूर शायर जावेद अख्तर की नज़्म—”जिधर जाते हैं सब, उधर जाना अच्छा नहीं लगता, मुझे पामाल रस्तों का सफर अच्छा नहीं लगता। झूठी बातों को खामोशी से सुनना उस पे हामी भर लेना, बहुत हैं फायदे इसके मगर अच्छा नहीं लगता”—सुनाकर महफिल में जोश भर दिया। दो घंटे चली इस साहित्यिक महफिल का तालियों व वाहवाह की गूंज के साथ समापन हुआ।

संस्था की अध्यक्ष सुश्री अंबिका सिंह ने साहित्य, कविता व शे’र-ओ-शायरी के माध्यम से देशप्रेम, आपसी सौहार्द व प्रेम के प्रयासों की सराहना की। धस्माना ने कहा, “साहित्य, कविता, नज़्म व गीत समाज का दर्पण हैं। यदि कवि-शायर ईमानदारी से काम करें, तो समाज की परिस्थितियों व घटनाओं की सच्ची तस्वीर उभरती है।”

कार्यक्रम की अध्यक्षता लब्धप्रतिष्ठित कवि सतीश बंसल ने की। उन्होंने अपनी श्रृंगार रस की कविता से सभी को भावविभोर किया तथा वर्तमान दौर की चाटुकारिता पर चोट करते हुए—”रीढ़ विहीनों चारण भाटो, टुकड़ों में ईमान बेचकर, पेशे का सम्मान बेचकर। आकाओं से माल बटोरो, कुंठा का सामान बेचकर। ताज सजाओ मिथ्या के सर और सत्य की गर्दन काटो”—रचना सुनाकर खूब तालियां बटोरीं।

विशिष्ट अतिथियों में गायक-संगीतकार सनावर अली खान व एक्ट्रेस इंद्राणी पांधी शामिल रहीं। सनावर अली खान की ग़ज़लों ने दर्शकों को खूब उत्साहित किया। संचालन परमवीर कौशिक ने किया।

नशिस्त में अंबिका सिंह रूही, सतीश बंसल, परमवीर कौशिक, अमजद खान, मोनिका अरोड़ा मंतशा, आरिफ अतीब, तस्नीमा कौसर, एएस शाह, कमाल तकी व जोया ने रचनाएं पेश कर वाहवाही लूटी। मौके पर लल्लन भाई, अश्विनी, संदीप तिमनी, कुमुद तिमनी व कांग्रेस नेता दिनेश कौशल आदि उपस्थित रहे।

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