देहरादून/उत्तरकाशी । उत्तराखंड में सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार एक बार फिर उजागर हुआ है। उत्तरकाशी जिले के भटवाड़ी कैंप कार्यालय में तैनात लोक निर्माण विभाग (PWD) के अमीन टीका राम नौटियाल को उत्तराखंड विजिलेंस विभाग की टीम ने रिश्वत स्वीकार करते हुए गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई 22 जनवरी 2026 को की गई, जिसने विभागीय स्तर पर खलबली मचा दी है। लोक निर्माण विभाग (PWD) में तैनात अमीन को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़े जाने से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। सतर्कता अधिष्ठान की टीम ने उत्तरकाशी जनपद में कार्रवाई करते हुए ₹10,000 की रिश्वत लेते समय अमीन को गिरफ्तार किया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी अमीन पर सड़क निर्माण कार्य के दौरान कटान से प्रभावित भूमि के मुआवजे की फाइल आगे बढ़ाने के बदले शिकायतकर्ता से अवैध धन की मांग करने का आरोप था। शिकायत की पुष्टि के बाद सतर्कता अधिष्ठान ने जाल बिछाया और तय योजना के तहत 22 जनवरी 2026 को उसे रिश्वत की रकम स्वीकार करते हुए मौके पर ही पकड़ लिया।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत मामला दर्ज कर लिया गया है। सतर्कता विभाग का कहना है कि प्रकरण से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है और दोष सिद्ध होने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सड़क, पुल और अन्य विकास कार्यों के दौरान भूमि अधिग्रहण या कटान के बाद मुआवजा प्राप्त करना आम नागरिकों के लिए पहले से ही जटिल प्रक्रिया माना जाता है। ऐसे में यदि जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारी इस प्रक्रिया को निजी कमाई का जरिया बना लें, तो यह सीधे तौर पर जनता के अधिकारों पर प्रहार है। उत्तरकाशी का यह मामला उसी कड़वी सच्चाई की ओर इशारा करता है।
लगातार हो रही गिरफ्तारियां यह तो दर्शाती हैं कि सतर्कता एजेंसियां सक्रिय हैं, लेकिन साथ ही यह सवाल भी उठता है कि क्या भ्रष्टाचार अब भी व्यवस्था की “अंदरूनी बीमारी” बना हुआ है। क्या डर सिर्फ पकड़े जाने तक ही सीमित है, या व्यवस्था में वास्तविक सुधार की दिशा में ठोस कदम भी उठाए जाएंगे?
सतर्कता अधिष्ठान ने आम जनता से अपील की है कि यदि कोई सरकारी अधिकारी या कर्मचारी रिश्वत की मांग करता है, तो बिना भय शिकायत दर्ज कराएं। विभाग ने भरोसा दिलाया है कि शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि उत्तरकाशी में PWD अमीन की गिरफ्तारी एक चेतावनी है—सरकारी पद अब ढाल नहीं, बल्कि जवाबदेही की जिम्मेदारी है।
हालांकि, जानकारों का मानना है कि जब तक रिश्वतखोरी पर केवल कार्रवाई ही नहीं, बल्कि कड़ी सजा और सिस्टम में व्यापक सुधार नहीं होंगे, तब तक ऐसे मामले सामने आते रहेंगे।

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