रुद्रपुर कांड पर बोले करण महारा— ‘देवभूमि में असुरक्षित हैं बेटियां, फट गया सुशासन का ढोल’

करण महारा का भाजपा सरकार पर बड़ा तंज: ‘रुद्रपुर की दरिंदगी ने खोखले दावों की पोल खोल दी’

रुद्रपुर/देहरादून: उत्तराखंड के रुद्रपुर में एक फैक्ट्री कर्मचारी महिला के साथ लिफ्ट के नाम पर हुए सामूहिक बलात्कार और उसे सड़क पर फेंकने की घटना पर कांग्रेस नेता व पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि यह महज एक अपराध नहीं, बल्कि पूरे शासन तंत्र के मुंह पर तमाचा है। उन्होंने कहा कि यदि एक मेहनतकश महिला काम से लौटते समय भी सुरक्षित नहीं है, तो यह सरकार किसके लिए है?

करन माहरा, जो कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) के भी सदस्य हैं, ने एक तीखे बयान में कहा कि भाजपा के शासनकाल में उत्तराखंड महिलाओं के लिए लगातार असुरक्षित होता जा रहा है। उन्होंने कहा, “देहरादून पहले ही सवालों के घेरे में है, अब रुद्रपुर, हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर जैसे मैदानी इलाकों से लेकर पहाड़ तक अपराध की घटनाएं आम होती जा रही हैं। सरकार की प्राथमिकताओं में न तो महिला सुरक्षा है, न ही अपराधियों के भीतर कानून का डर। नतीजा यह है कि अपराधी बेखौफ हैं और बेटियाँ डरी हुई।”

उन्होंने सरकारी बयानबाजी पर भी सवाल उठाए, “हर घटना के बाद वही रटा-रटाया बयान आता है कि ‘जांच होगी’, ‘कड़ी कार्रवाई की जाएगी’, ‘कानून अपना काम करेगा’। लेकिन ज़मीनी सच्चाई यह है कि न तो पुलिस व्यवस्था मजबूत हुई, न ही अपराधियों को समय पर सज़ा मिली। सत्ता के संरक्षण में अपराध पनप रहे हैं और सरकार मूकदर्शक बनी हुई है।”

माहरा ने उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत का जिक्र करते हुए कहा, “इस देवभूमि को कभी नारी को शक्ति और सम्मान का प्रतीक माना जाता था। आज उसी धरती पर बेटियों को सड़क पर फेंका जा रहा है और सरकार कुर्सी बचाने की राजनीति में व्यस्त है। यह सिर्फ कानून-व्यवस्था का सवाल नहीं, बल्कि पहाड़ की अस्मिता, सम्मान और सामाजिक ताने-बाने पर सीधा हमला है।”

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “अब बहुत हो चुका। अगर आज भी सरकार नहीं जागी, तो आने वाले समय में उत्तराखंड महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित राज्यों में गिना जाएगा। भाजपा सरकार को जवाब देना होगा कि आखिर कब तक बहनों-बेटियों की इज्ज़त की कीमत पर यह सत्ता चलती रहेगी? जनता सब देख रही है, और यह अन्याय ज्यादा दिन तक बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

रुद्रपुर की इस भीषण घटना ने एक बार फिर राज्य में महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की गंभीर चुनौती को रेखांकित किया है, जिस पर सत्ता पक्ष को गंभीर सवालों का सामना करना पड़ रहा है।

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