देहरादून। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने उत्तराखंड में बिगड़ते कानून-व्यवस्था के हालात पर चिंता जताते हुए कहा है कि राज्य में अपराधियों के मन से पुलिस का खौफ पूरी तरह समाप्त हो चुका है और अराजक तत्व बेखौफ होकर आपराधिक घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि 16 फरवरी को राजभवन कूच में यह मुख्य मुद्दा रहेगा।
श्री धस्माना ने शनिवार को अपने कैंप कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में हाल की कुछ जघन्य घटनाओं का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो चुकी है। उन्होंने देहरादून के व्यस्ततम पलटन बाजार में सुबह-सुबह सरेआम एक युवती की हत्या, हरिद्वार में रविदास जयंती के भंडारे में गोलीबारी से दो लोगों की मौत और ऋषिकेश में एक युवती की हत्या का उदाहरण दिया।
विशेष रूप से पलटन बाजार हत्याकांड पर उन्होंने गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि मृत युवती ने 31 जनवरी को कोतवाली पुलिस को लिखित में अपनी जान को खतरे की शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस ने उस पर कोई संज्ञान नहीं लिया और महज दो दिन बाद उसकी सरेआम हत्या कर दी गई। “यह पुलिस की गंभीर लापरवाही और निष्क्रियता को दर्शाता है,” उन्होंने कहा।
श्री धस्माना ने कहा, “प्रदेश में पुलिसिंग नाम की कोई चीज नहीं बची है। अपराधी राजधानी के सबसे भीड़-भाड़ वाले इलाके में दिनदहाड़े हत्या कर रहे हैं। कुछ मामलों में गिरफ्तारी करके पुलिस अपनी पीठ थपथपा लेती है, लेकिन अपराधों पर अंकुश लगाने में वह पूरी तरह विफल है।”
उन्होंने चेतावनी दी कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामले में उत्तराखंड पहले ही पर्वतीय राज्यों में शीर्ष पर है और अब हत्या, लूट, डकैती जैसे गंभीर अपराधों में भी यह अपने पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश को कड़ी टक्कर दे रहा है।
श्री धस्माना ने घोषणा की कि आगामी 16 फरवरी को राजधानी देहरादून में कांग्रेस द्वारा आयोजित राजभवन घेराव कार्यक्रम में प्रदेश की ध्वस्त कानून-व्यवस्था मुख्य मुद्दों में से एक होगी। उन्होंने कहा कि जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सरकार की विफलता के खिलाफ यह प्रदर्शन आवाज उठाएगा और सरकार से जवाब तलब किया जाएगा।
कांग्रेस नेता के इन आरोपों से राज्य सरकार के लिए एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। हाल के दिनों में लगातार हो रहे गंभीर अपराधों ने आम जनता में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है। ऐसे में विपक्ष द्वारा उठाई गई यह आवाज राजनीतिक गलियारों में गूंजने के साथ-साथ प्रशासनिक तंत्र के लिए भी एक चेतावनी है।

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