जन संघर्ष मोर्चा ने स्वास्थ्य मंत्री पर लगाए गंभीर आरोप, आंदोलन की दी चेतावनी

प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों से ‘लूट’ पर लगाम को विजिलेंस सेल बनाने की मांग

देहरादून / विकासनगर। निजी अस्पतालों द्वारा कथित रूप से मरीजों से की जा रही वसूली और इलाज में लापरवाही के मामलों ने अब राजनीतिक रुख अख्तियार कर लिया है। जन संघर्ष मोर्चा ने प्रदेश सरकार पर आरोप लगाया है कि स्वास्थ्य मंत्री की अनुभवहीनता और अधिकारियों पर नियंत्रण के अभाव में निजी अस्पतालों में मरीजों से लूट-खसोट की घटनाएं आम हो गई हैं। मोर्चा ने इस प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए तत्काल एक संयुक्त विजिलेंस सेल के गठन की मांग की है।

शुक्रवार को यहां पत्रकारों से बातचीत करते हुए जन संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष एवं जीएनवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने कहा कि वर्तमान में कई नामी प्राइवेट अस्पताल मरीजों और उनके परिजनों की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इलाज के नाम पर होने वाली अत्यधिक वसूली, अनावश्यक भर्तियां और यहां तक कि मृत मरीजों के नाम पर बिल बनाने जैसी घटनाओं से प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खुल रही है।

श्री नेगी ने कहा कि सरकार को इस समस्या के समाधान के लिए पुलिस अधिकारियों और वरिष्ठ चिकित्सकों का एक संयुक्त विजिलेंस सेल गठित करना चाहिए। उन्होंने बताया कि यह सेल विशेष रूप से आईसीयू और वेंटीलेटर में भर्ती गंभीर मरीजों की पड़ताल करेगा और आपात स्थिति में मरीजों की वास्तविक स्थिति का आकलन करेगा।
“इस सेल के गठन से न सिर्फ आम मरीजों को राहत मिलेगी, बल्कि आयुष्मान और गोल्डन कार्ड जैसी सरकारी योजनाओं के नाम पर होने वाली धांधली पर भी अंकुश लगेगा,” श्री नेगी ने कहा। उनका मानना है कि इस कदम से नकद भुगतान करने वाले मरीजों को भी अनावश्यक खर्च से बचाया जा सकेगा।

मोर्चा अध्यक्ष ने सरकारी अस्पतालों की बदहाली पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पताल महज रेफरल सेंटर बनकर रह गए हैं, जिसके कारण मरीजों को निजी अस्पतालों के भरोसे रहना पड़ता है। इस स्थिति से निपटने के लिए उन्होंने अस्पताल खोलने के मानकों में आमूल-चूल परिवर्तन और सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को चाक-चौबंद करने की मांग की, ताकि मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके और उन्हें निजी अस्पतालों के चक्कर न लगाने पड़

रघुनाथ सिंह नेगी ने स्वास्थ्य मंत्री पर तीखा हमला बोलते हुए आश्चर्य जताया कि वह इन गंभीर मामलों में कोई दिलचस्पी क्यों नहीं ले रहे हैं। उन्होंने कहा, “स्वास्थ्य मंत्री का गैर-जिम्मेदाराना रवैया और मरीजों के जीवन से खिलवाड़ को लेकर उनकी उदासीनता साफ देखी जा सकती है। ऐसा लगता है मानो निजी अस्पतालों को मनमानी करने की खुली छूट दे दी गई हो।”

मोर्चा ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने और प्राइवेट अस्पतालों द्वारा की जा रही कथित लूट पर रोक लगाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए, तो वह सड़क पर उतरेगा। श्री नेगी ने कहा कि मोर्चा इस मामले को सरकार के समक्ष रखेगा और आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेगा।
इस पत्रकार वार्ता के दौरान विजयराम शर्मा और अध्यक्ष अमित जैन भी मौजूद थे।

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