भाजपा सरकार के मंत्रियों व नेताओं ने हड़पा अर्बन कॉपरेटिव बैंक का रुपया – सूर्यकांत धस्माना

सीबीआई जांच की मांग को लेकर कांग्रेस का हमला


देहरादून।  उत्तराखंड में सहकारिता विभाग के अंतर्गत पंजीकृत दून अर्बन कोऑपरेटिव बैंक में हुए करोड़ों रुपये के कथित घोटाले को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि इस घोटाले में भाजपा सरकार के दो मंत्रियों के नजदीकी रिश्तेदार शामिल हैं और उन्होंने बैंक का पैसा हड़पा है। कांग्रेस ने इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग की है।

प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में एआईसीसी सदस्य एवं प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने आरोप लगाया कि बैंक प्रबंधन, शासन-प्रशासन, आरबीआई और सरकार को इस घोटाले की पूरी जानकारी होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा, “आरबीआई की जांच भी हो चुकी है, लेकिन वह भी खामोश है। यह साफ संकेत है कि सत्ताधारी दल के मंत्रियों और नेताओं की संलिप्तता इस घोटाले में है।”

श्री धस्माना ने आरोप लगाया कि बैंक द्वारा बिना किसी गारंटी और गलत पते पर कुछ लोगों को मोटी रकम लोन के रूप में दी गई, जिसे नहीं लौटाया गया। उन्होंने कहा कि ये खाते लंबे समय से एनपीए चल रहे हैं। विशेष रूप से उन्होंने कहा कि इस घोटाले में प्रदेश सरकार के दो मंत्रियों के नजदीकी रिश्तेदार शामिल हैं, जिन्होंने गलत तथ्य देकर बैंक से मोटी रकम हड़पी है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि यह घोटाला तीन सालों से चला आ रहा है, लेकिन सिस्टम बेसुध होकर सोया रहा। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि न तो इसकी सार्वजनिक घोषणा हुई और न ही कोई कार्रवाई की गई।

श्री धस्माना ने मांग की कि:

1. इस पूरे घोटाले की जांच सीबीआई से करवाई जाए।
2. बैंक के ग्राहकों की मेहनत की कमाई हड़पने वालों के खिलाफ रिकवरी के साथ-साथ आपराधिक धाराओं में गबन का मुकदमा दर्ज किया जाए।
3. गलत तथ्य देकर बैंक से रकम लेने और हड़पने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को तत्काल इस पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की संस्तुति करनी चाहिए, ताकी हजारों ग्राहकों के करोड़ों रुपये डूबने से बचाए जा सकें।

गौरतलब है कि यह मामला उत्तराखंड के सहकारिता विभाग में पंजीकृत दून अर्बन कोऑपरेटिव बैंक से जुड़ा हुआ है, जिसमें बड़ी संख्या में आम नागरिकों के पैसे फंसे होने की आशंका है। फिलहाल सरकार या आरबीआई की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

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