देहरादून। उत्तराखण्ड पुलिस मुख्यालय ने प्रदेश के सभी न्यायालय परिसरों की सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ और अभेद्य बनाने के लिए बुधवार को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। पुलिस मुख्यालय ने सभी जनपदों को निर्देशित किया है कि वे माननीय न्यायाधीशों, न्यायालयों एवं न्यायालय परिसरों की सुरक्षा का व्यापक ऑडिट करें और पूर्व में चिन्हित कमियों का तत्काल निराकरण सुनिश्चित करें।
पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी प्रमुख निर्देशों के अनुसार, अब सभी जनपदों में न्यायालय परिसरों में पर्याप्त संख्या में पुलिस और पीएसी बल को आवश्यक सुरक्षा उपकरणों के साथ तैनात किया जाएगा। न्यायालयों के प्रवेश और निकासी द्वारों पर संबंधित अधिकारियों से विचार-विमर्श कर पहचान पत्र (आईडी कार्ड) के माध्यम से प्रवेश की अनिवार्य व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि कोई भी अनाधिकृत व्यक्ति परिसर में प्रवेश न कर सके।
सुरक्षा को और चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए न्यायालय परिसरों में बैरियर लगाकर एक्सेस कंट्रोल सिस्टम स्थापित करने और प्रवेश द्वारों पर आने वाले सभी व्यक्तियों की स्क्रीनिंग की सुदृढ़ व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है। इस कार्य के लिए स्थानीय अभिसूचना इकाई (लोकल इंटेलिजेंस यूनिट) और अन्य पुलिस बल को तैनात किया जाएगा।
पुलिस मुख्यालय ने संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा में तैनात कर्मियों को विशेष रूप से सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। आतंकवादी घटनाओं और बम हमलों जैसी किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए अब न्यायालय परिसरों में क्विक रिस्पांस टीम (क्यूआरटी) और यथासंभव एटीएस (आतंकवाद निरोधक दस्ता) की टीमों को भी तैनात करना अनिवार्य होगा।
इसके अतिरिक्त, न्यायालय की कार्यवाही शुरू होने से पूर्व प्रतिदिन सुबह बम डिस्पोजल दस्ते और डॉग स्क्वाड द्वारा एंटी-सबोटेज (एएस) चेकिंग अनिवार्य रूप से कराने के आदेश दिए गए हैं। न्यायालय परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों से लगातार निगरानी करने और नियमित रूप से पेट्रोलिंग सुनिश्चित करने को भी कहा गया है।
सुरक्षा में किसी भी प्रकार की चूक से बचने के लिए ड्यूटी पर तैनात कर्मियों की नियमित जांच करने और समय-समय पर मॉक ड्रिल (अभ्यास) आयोजित करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। साथ ही, किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एक सुव्यवस्थित आपातकालीन निकास योजना (इमरजेंसी इग्जिट प्लान) बनाने पर भी जोर दिया गया है।
पुलिस मुख्यालय ने सभी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों एवं पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित किया है कि इन आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करते हुए समय-समय पर समीक्षा भी की जाए, जिससे न्यायालय परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था पूर्णतः चाक-चौबंद और अभेद्य बनी रहे।

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