देहरादून। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा आयोजित ‘दिव्य कला मेला’ के तहत आज रेंजर्स ग्राउंड में एक विशाल रोजगार मेले का आयोजन किया गया, जो दिव्यांगजनों के लिए आशा और सम्मान की एक नई किरण लेकर आया। इस रोजगार पर्व में प्रदेश भर से 250 दिव्यांग अभ्यर्थियों ने उत्साहपूर्वक पंजीकरण कराया और अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
एनडीएफडीसी इंडिया के सहयोग से आयोजित इस मेले में देश की 15 प्रतिष्ठित कंपनियों ने भागीदारी की, जिनमें जोमैटो, निवा बूपा, हीरो मोटोकॉर्प, आईलीड्स, नाबेट और रेडफॉक्स जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल रहीं। इनमें से 13 संस्थानों ने मेले में ऑफलाइन उपस्थिति दर्ज कराकर साक्षात्कार लिए, जबकि दो संस्थानों ने ऑनलाइन माध्यम से योग्य अभ्यर्थियों का चयन किया।
कड़ी चयन प्रक्रिया के बाद 12 दिव्यांगजनों को उनकी योग्यता के आधार पर तत्काल नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। वहीं, 65 अन्य अभ्यर्थियों को भविष्य में रोजगार के अवसरों के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया, जिससे उनके चेहरे खिल उठे।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण सुश्री नंदी और सुश्री हिमांशी रहीं, जिन्हें नाबेट आईटी सर्विसेज द्वारा मंच पर ही नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। इस पल ने न केवल उनका जीवन बदल दिया, बल्कि मौजूद अन्य सैकड़ों अभ्यर्थियों में भी आत्मविश्वास और उत्साह का संचार कर दिया। इस पहल से यह संदेश गया कि योग्यता ही असली पहचान है और दिव्यांगजन हर क्षेत्र में अपना लोहा मनवा सकते हैं।

दिव्यांग अभ्यर्थियों का मनोबल बढ़ाने के लिए जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपंकर घिल्डियाल विशेष रूप से कार्यक्रम स्थल पर पधारे। उन्होंने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के मेले दिव्यांगजनों को मुख्यधारा से जोड़ने में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं।
इस अवसर पर एनआईईपीवीडी और एनडीएफडीसी के वरिष्ठ अधिकारी विनीत राना एवं अरविंद कुमार भी उपस्थित रहे और उन्होंने अभ्यर्थियों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम का सफल संचालन और समन्वयन एनआईईपीवीडी संस्थान के अधिकारियों और कार्मिकों—अमित कुमार शर्मा (प्रधानाचार्य), डॉ. सुनील कुमार शिरपुरकर, डॉ. पंकज कुमार, सतेंदर शर्मा, जगदीश लखेरा, भूपेंद्र राना, विनीत कुमार तथा सहायक प्लेसमेंट अधिकारी परमील कुमार ने मिलकर किया।
यह आयोजन न केवल रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने वाला एक मेला भर था, बल्कि यह आत्मनिर्भरता, सम्मान और समावेशिता की दिशा में उठाया गया एक सशक्त कदम साबित हुआ। इसने एक बार फिर साबित कर दिया कि जब हौसले बुलंद हों, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती।

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