देहरादून। उत्तराखंड एसटीएफ और साइबर क्राइम पुलिस टीम ने निवेश के नाम पर करोड़ों की धोखाधड़ी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। प्रतिष्ठित निवेश फर्म की आड़ में चल रहे इस खेल का खुलासा करते हुए पुलिस ने मुख्य आरोपी को हरियाणा के अंबाला से गिरफ्तार किया है। ठगों ने पीड़ित को ‘वीआईपी ग्रुप’ में जोड़कर भारी मुनाफे का लालच दिया और सवा करोड़ के करीब की चपत लगा दी।
मामले का खुलासा करते हुए एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि देहरादून निवासी एक व्यक्ति ने अप्रैल 2025 में शिकायत दर्ज कराई थी। ठगों ने खुद को विख्यात निवेश फर्म ASK Investment Managers Ltd. का वित्तीय सलाहकार बताकर व्हाट्सएप पर संपर्क किया। पीड़ित को “274-1V1 VIP Group” जैसे लुभावने नाम वाले ग्रुप्स में जोड़ा गया और “ASKICPRO” नामक एक फर्जी ऐप डाउनलोड करवाई गई।
गिरोह ने पीड़ित को ऐप पर फर्जी ट्रेडिंग डैशबोर्ड दिखाया, जिसमें निवेश की गई रकम और उस पर मिलने वाला ‘मुनाफा’ लगातार बढ़ता दिख रहा था। इसी झांसे में आकर पीड़ित ने विभिन्न बैंक खातों में कुल ₹1,17,00,000 (एक करोड़ सत्रह लाख रुपये) जमा कर दिए। जब पीड़ित ने अपनी रकम निकालनी चाही, तो ठगों ने 72 लाख रुपये अतिरिक्त कमीशन की मांग की, जिसके बाद उसे ठगी का एहसास हुआ।
जांच के दौरान साइबर टीम ने मेटा (Meta) और संबंधित बैंकों से डेटा जुटाया। साक्ष्यों के आधार पर आरोपी बलजीत सिंह (निवासी: अंबाला, हरियाणा) को चिन्हित किया गया। एसटीएफ ने विधिक कार्यवाही करते हुए उसे अंबाला से Warrant B के तहत गिरफ्तार किया और देहरादून न्यायालय में पेश किया। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी के बैंक खातों में महज 1-2 महीनों के भीतर लाखों का लेनदेन हुआ है और उसके खिलाफ कई राज्यों में मुकदमे दर्ज हैं।
एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने इस बड़ी कार्रवाई के साथ ही आमजन के लिए महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है:
- डिजिटल अरेस्ट से न डरें: कोई भी सरकारी एजेंसी (CBI, ED या पुलिस) व्हाट्सएप पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ या नोटिस नहीं भेजती।
- अज्ञात ऐप से बचें: बिना पूरी जांच-पड़ताल के किसी भी अनजान लिंक या निवेश ऐप (जैसे ASKICPRO) पर पैसा न लगाएं।
- गूगल सर्च पर भरोसा न करें: किसी भी कंपनी का कस्टमर केयर नंबर सीधे गूगल से न उठाएं, वह फर्जी हो सकता है।
- शिकायत कहाँ करें: साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या ‘चाक्षु’ पोर्टल और www.cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट दर्ज कराएं।
इस चुनौतीपूर्ण मामले को सुलझाने में निरीक्षक विकास भारद्वाज, उपनिरीक्षक दिनेश पंवार और कांस्टेबल नीरज की टीम ने अहम भूमिका निभाई। डीजीपी दीपम सेठ और एडीजी लॉ एंड ऑर्डर डॉ. वी. मुरुगेसन ने टीम की तत्परता की सराहना की है।

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