टिहरी गढ़वाल/देहरादून। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रविवार को संपन्न ‘द टिहरी लेक फेस्टिवल’ में उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने प्रदेश की बेटियों की दृढ़ इच्छाशक्ति को प्रदेश की सबसे बड़ी पूंजी बताया। मुख्य अतिथि के तौर पर आयोजन में शिरकत करते हुए राज्यपाल ने अपने संबोधन में महिला सशक्तिकरण की तस्वीर को चार जीवंत संस्मरणों के जरिए इतनी खूबसूरती से पेश किया कि पूरा पांडाल देर तक तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा।
राज्यपाल ने कहा कि यह उत्सव केवल टिहरी झील की खूबसूरती तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने पूरे उत्तराखंड की क्षमता को देश-दुनिया के सामने रखा। चार दिवसीय इस भव्य आयोजन में 15 से अधिक प्रतियोगिताओं में साढ़े तीन हजार प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। राज्यपाल ने कहा, “यह त्योहार पर्यावरण, बारामासी पर्यटन, स्थानीय संस्कृति और साहसिक खेलों का ऐसा संगम है, जो विकसित भारत के निर्माण में उत्तराखंड की भूमिका को साबित करता है।”
अपने भाषण के एक बड़े हिस्से में राज्यपाल ने प्रदेश की महिलाओं और बेटियों की उपलब्धियों को रेखांकित किया। उन्होंने इसे शासकीय भाषण की बजाय एक प्रेरक कहानी की तरह पिरोया:
- CDS बनने का सपना: राज्यपाल ने देहरादून के एक कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा, “नौवीं कक्षा की एक NCC कैडेट से जब मैंने पूछा कि तुम क्या बनना चाहती हो, तो उसने बिना किसी झिझक के जवाब दिया, ‘सर, मैं चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) बनूंगी’। एक पूर्व सैनिक होने के नाते मैं आपको बता सकता हूँ कि यह सुनकर मेरा सीना गर्व से चौड़ा हो गया।”
- ‘आई लव टेक्नोलॉजी’: उन्होंने तकनीकी विश्वविद्यालय में AI प्रतियोगिता में मिली एक छात्रा की चर्चा करते हुए बताया, “उस बेटी ने मुझसे कहा- ‘सर, आई लव टेक्नोलॉजी’। यह बताता है कि हमारी बेटियां अब सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं हैं, वे तकनीक की दुनिया पर राज करने को तैयार हैं।”
- न्यूयॉर्क तक पहुंचा ‘पहाड़ी लूण’: राज्यपाल ने अपने पहले दौरे को याद करते हुए कहा, “मैं एक स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से मिला, जो नौ प्रकार का पहाड़ी नमक बनाती हैं। आज वही ‘लूण’ लंदन और न्यूयॉर्क की मंडियों में बिक रहा है। यह महिला सशक्तिकरण की असली तस्वीर है।”
- एक लाख से एक करोड़ का सफर: अल्मोड़ा की एक मशरूम उत्पादक महिला का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि कैसे वह महिला 25 हजार मासिक कमाई से छह महीने में एक लाख तक पहुंची। राज्यपाल ने कहा, “अब हमें उससे एक करोड़ रुपये सालाना कमाई की उम्मीद है। पहाड़ की बेटियों में असीम संभावनाएं है।

राज्यपाल ने टिहरी के इतिहास और भूगोल को अपने भाषण का हिस्सा बनाते हुए पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने महोत्सव में ‘हिमालयन O2’ अभियान को शामिल किए जाने की सराहना की और कहा कि यह हिमालय की रक्षा का संदेश देता है। उन्होंने ‘छुंई बाथ’ जैसे सत्रों को किताब के रूप में संकलित करने की आवश्यकता जताई, ताकि हिमालयी सरोकारों पर हुई चर्चाएं आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बन सकें।
राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड को ‘बारह महीने पर्यटन’ वाला राज्य बनाने का जो सपना देखा था, टिहरी फेस्टिवल उसी दिशा में एक बड़ा कदम है। “यह केवल चार धाम की यात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि शीतकालीन पर्यटन, ग्रामीण पर्यटन और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देकर हम प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं।”
कार्यक्रम के अंत में राज्यपाल ने पेंटिंग, मास्टर शेफ, ग्रुप फैशन शो और ‘मिस्टर एंड मिसेज टिहरी’ प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार वितरित किए। इस मौके पर जिला प्रशासन ने उन्हें पारंपरिक वाद्य यंत्र ‘रणसिंगा’ की प्रतिकृति भेंट कर सम्मानित किया।
महिला दिवस की रंगत में रंगे इस अवसर पर सुर गंगा संगीत कला मंच की ओर से मनमोहक नाट्य प्रस्तुति भी दी गई। कार्यक्रम में दायित्वधारी राज्य मंत्री विनोद उनियाल, गीता रावत, विधायक किशोर उपाध्याय, जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आयुष अग्रवाल, जिला पंचायत अध्यक्ष इशिता सजवाण सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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