बजट सत्र के दूसरे दिन प्रश्नकाल में घिरे वन मंत्री सुबोध उनियाल, सियासी समीकरण भी हुए फेल

जंगल राज में मंत्री का ‘शिकार’, सदन में गूंजा मानव-वन्यजीव संकट


गैरसैण।  उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र का दूसरा दिन वन मंत्री सुबोध उनियाल के लिए किसी अग्नि-परीक्षा से कम नहीं रहा। मंगलवार को प्रश्नकाल में जैसे ही वन विभाग से जुड़े मसले उठे, सदन में सियासी रंगों से परे एक गंभीर जन-आक्रोश देखने को मिला। विपक्ष ही नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के अपने विधायकों ने भी मंत्री जी को जमकर घेरा, जिससे पूरे सदन में मानव-वन्यजीव संघर्ष की गूंज साफ सुनी गई।

प्रश्नकाल की शुरुआत होते ही डोईवाला से भाजपा विधायक बृजभूषण गैरोला ने सरकार को आईना दिखाया। उन्होंने पूछा कि आखिर वन्य जीवों के हमलों में जान गंवाने वालों का क्या होगा? जवाब में मंत्री उनियाल ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2000 से लेकर जनवरी 2026 तक प्रदेश में 1296 लोगों ने जंगली जानवरों के हमले में अपनी जान गंवाई है, जबकि 6624 लोग बुरी तरह घायल हुए हैं। मंत्री ने यह भी बताया कि सरकार ने मुआवजा बढ़ाकर अब 10 लाख रुपये कर दिया है, लेकिन इस राशि के वितरण में हो रही देरी पर कांग्रेस सदस्यों ने नाराजगी जताते हुए सरकार पर हमला बोल दिया।

सबसे दिलचस्प पहलू यह रहा कि मंत्री पर तीर सिर्फ विपक्ष ही नहीं, बल्कि उनके अपने साथियों ने भी चलाए। भाजपा के वरिष्ठ विधायक खजान दास ने वन कानूनों की विसंगतियों को उछालते हुए हिमाचल प्रदेश का उदाहरण दिया। उन्होंने कटाक्ष करते हुए पूछा कि आखिर उत्तराखंड में सड़क और विकास परियोजनाएं फॉरेस्ट क्लीयरेंस की भेंट क्यों चढ़ जाती हैं? वहीं विधायक विनोद कंडारी और महेश जीना ने पहाड़ों में बर्बाद होती फसलों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जंगली जानवरों से किसानों की आजीविका छिन रही है, लेकिन विभाग बेखबर है।

बढ़ते सवालों के बीच वन मंत्री सुबोध उनियाल ने बचाव की कोशिश करते हुए कहा कि सरकार ने फॉरेस्ट क्लीयरेंस की प्रक्रिया को तेज किया है और पिछले साल पीडब्ल्यूडी, पेयजल समेत छह विभागों के 713 प्रकरणों को मंजूरी दी गई। हालांकि, यमुनोत्री-खरसाली रोपवे परियोजना को लेकर विधायक संजय डोभाल के सवाल पर जवाब देने में मंत्री को पसीना आ गया। इसी बीच विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने सख्त अंदाज में कहा, “यह प्रदेश के ज्वलंत मुद्दे हैं, इन पर गंभीरता और स्पष्टता से जवाब दिया जाए।” स्पीकर के इस हस्तक्षेप के बाद सदन का तापमान और बढ़ गया, जिससे साफ हो गया कि वन विभाग अब जिरह के घेरे में है और उसे जल्द ही ठोस जवाब देने होंगे।

ऐसी और भी खबरें पढ़ने के लिए बने रहें merouttarakhand.in के साथ।
Subscribe our Whatsapp Channel
Like Our Facebook & Instagram Page
RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments