‘कप्तान अंकल, आप हमारी रक्षा करते हैं’… एसएसपी ऑफिस पहुंची नन्ही मुस्कान ने बिखेरी प्यार की फुहार

फूलों का गुलदस्ता लेकर पहुंची बच्ची ने जीता पुलिस कप्तान का दिल, मासूम के भरोसे ने खाकी को किया नतमस्तक

देहरादून। आमतौर पर पुलिस कार्यालय में फरियादियों की लंबी कतारें, तनाव भरे चेहरे और गंभीर शिकायतें देखने को मिलती हैं, लेकिन सोमवार का यह दिन दून पुलिस मुख्यालय के लिए बेहद खास और भावुक कर देने वाला रहा। यहां कोई फरियादी नहीं, बल्कि एक नन्ही परी अपने ‘कप्तान अंकल’ से मिलने पहुंची, जिसने अपनी मासूमियत और प्यार से पूरे कार्यालय को भावुक कर दिया।

रंग-बिरंगे फूलों का एक प्यारा सा गुलदस्ता अपने नन्हे हाथों में थामे एक छोटी सी बच्ची जब एसएसपी कार्यालय के गलियारे से गुजरी, तो वहां मौजूद हर कोई ठिठक कर उसे निहारने लगा। चंद साल की उस मासूम के चेहरे पर डर या शिकन नहीं, बल्कि खाकी के प्रति अजीब सा आकर्षण और अपनापन झलक रहा था। उसकी चंचल चाल और मुस्कान ने गंभीर पुलिस कार्यालय के माहौल को एक पल में बचपन के उस बगीचे में बदल दिया, जहां प्यार के सिवा कोई और भाव नहीं होता।

जब उसे एसएसपी देहरादून के कक्ष में ले जाया गया, तो उसने बिना किसी हिचकिचाहट के अपने फूलों का गुलदस्ता पुलिस कप्तान को भेंट कर दिया। इतनी छोटी सी उम्र में वह ‘कप्तान अंकल’ से मिलने क्यों आई? इस सवाल पर बच्ची ने जो जवाब दिया, उसने वहां मौजूद हर अफसर और कर्मचारी की आंखें नम कर दीं।

बच्ची ने बड़ी मासूमियत से कहा, “चाहे दिन हो या रात, कड़ी धूप हो या सर्दी, पुलिस वाले अंकल हमेशा सड़क पर खड़े रहते हैं और हमारी रक्षा करते हैं। मैं उन्हें धन्यवाद देना चाहती थी।”

बच्ची की आंखों में पुलिस की वर्दी के प्रति कोई डर नहीं था, बल्कि किसी संरक्षक को देखने वाला अपनापन और गहरा सम्मान था। एक छोटी सी बच्ची ने जिस भरोसे और विश्वास के साथ खाकी को देखा, उसने पुलिस विभाग की बड़ी-बड़ी उपलब्धियों को भी पीछे छोड़ दिया।

बच्ची की इस मासूमियत भरी मुस्कान और पुलिस पर जताए गए अटूट भरोसे ने एसएसपी देहरादून का दिल भी जीत लिया। उन्होंने तुरंत अपने कर्तव्यों को छोड़कर उस नन्ही मेहमान का गर्मजोशी से स्वागत किया। एसएसपी ने प्यार से बच्ची के सिर पर हाथ रखा और उसे जीवन में खूब तरक्की मिलने का आशीर्वाद दिया।

इस दौरान बच्ची ने पुलिस कप्तान से यह भी कहा कि वह बड़ी होकर पुलिस ऑफिसर बनना चाहती है, ताकि वह भी लोगों की रक्षा कर सके। एसएसपी ने उसका हौसला बढ़ाते हुए कहा कि अगर लगन और इमानदारी से मेहनत करोगी तो एक दिन जरूर सफल होगी।

यह मुलाकात महज एक शिष्टाचार भेंट या औपचारिकता नहीं थी। यह उस भरोसे की जीवंत तस्वीर थी, जो आम जनता और पुलिस के बीच होना चाहिए। एक मासूम बच्ची ने बिना किसी स्वार्थ के, बिना किसी शिकायत के सिर्फ इसलिए पुलिस कप्तान से मुलाकात की, क्योंकि वह उन्हें अपना ‘रक्षक’ मानती है।

अक्सर जहां पुलिस को लेकर तनाव और अविश्वास की खबरें सुर्खियां बटोरती हैं, वहीं इस छोटी सी बच्ची ने यह संदेश दे दिया कि असली सम्मान बिना किसी अपेक्षा के दिल से निकलता है। उस दिन एसएसपी कार्यालय में सिर्फ एक बच्ची नहीं आई थी, बल्कि खाकी पर जनता के विश्वास की एक मासूम मुस्कान आई थी, जिसने हर वर्दी वाले का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया।

यह तस्वीर और यह भरोसा लंबे समय तक दून पुलिस के लिए प्रेरणा बनी रहेगी कि उनकी मेहनत और बलिदान को समाज का एक नन्हा सा हिस्सा भी बखूबी देख और समझ रहा है।

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