“जन-सेवा में ढिलाई नहीं चलेगी” — दून SSP का औचक निरीक्षण, वेरिफिकेशन से लेकर हेल्प डेस्क तक सख्त संदेश

देहरादून। आमजन से सीधे जुड़े कामकाज में तेजी और संवेदनशीलता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) देहरादून ने बुधवार को पुलिस कार्यालय में कार्यरत जन-सरोकार वाली शाखाओं का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान स्थानीय अभिसूचना इकाई (LIU) शाखा, वेरिफिकेशन सेल और पुलिस हेल्प डेस्क की कार्यप्रणाली परखते हुए एसएसपी ने साफ शब्दों में कहा कि सत्यापन और जनता की शिकायतों से जुड़े कार्य अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रहने चाहिए।

निरीक्षण के दौरान एसएसपी ने संबंधित शाखाओं में तैनात कर्मचारियों से उनके दैनिक कार्यों की विस्तृत जानकारी ली। वेरिफिकेशन सेल की समीक्षा करते हुए उन्होंने सत्यापन प्रक्रिया को तेज करने, फाइलों की नियमित निगरानी करने और किसी भी व्यक्ति के सत्यापन संबंधी दस्तावेज बिना कारण रोके रखने पर सख्त रुख अपनाने के निर्देश दिए।
एसएसपी ने संकेतों में स्पष्ट कर दिया कि यदि किसी स्तर पर टालमटोल, देरी या लापरवाही पाई गई तो जिम्मेदार कर्मियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस कार्यालय में स्थापित हेल्प डेस्क की जांच करते हुए एसएसपी ने वहां तैनात कर्मियों को निर्देश दिए कि एसएसपी कार्यालय आने वाले आगंतुकों/शिकायतकर्ताओं का रिकॉर्ड नियमित रूप से रजिस्टर में दर्ज किया जाए। साथ ही, उनकी समस्याओं के समाधान की स्थिति जानने के लिए समय-समय पर मोबाइल नंबर पर कॉल कर फॉलो-अप लेने को कहा गया, ताकि किसी भी शिकायतकर्ता को यह महसूस न हो कि उसकी बात “सुनकर छोड़ दी गई”।

निरीक्षण के दौरान एसएसपी ने सभी पुलिसकर्मियों को कड़ी हिदायत दी कि आमजन से दुर्व्यवहार या अनावश्यक रूप से परेशान किए जाने से जुड़ी किसी भी शिकायत को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। उन्होंने दो टूक कहा कि ऐसी शिकायत मिलने पर संबंधित कर्मी के खिलाफ नियमों के अनुसार विभागीय कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।

औचक निरीक्षण के दौरान एसएसपी ने अपने कार्यों/शिकायतों के संबंध में कार्यालय आए आगंतुकों से सीधी वार्ता भी की। बातचीत के जरिए उन्होंने यह जानने का प्रयास किया कि जन-सरोकार वाले कार्यों में लोगों को किन चरणों पर दिक्कतें आती हैं और किन बिंदुओं पर समय की बर्बादी होती है।

जन-सरोकार वाली शाखाओं—जैसे वेरिफिकेशन, हेल्प डेस्क और सूचनात्मक इकाइयों—में काम की गति सीधे आम नागरिक के अनुभव को प्रभावित करती है। सत्यापन में देरी से नौकरी/किरायेदारी/पासपोर्ट/अन्य प्रक्रियाएं अटकती हैं, जबकि हेल्प डेस्क पर लापरवाही से शिकायतकर्ता का भरोसा टूटता है। ऐसे में एसएसपी का यह दौरा संदेश देता है कि जनता के काम में देरी, उदासीनता और दुर्व्यवहार पर सख्ती होगी।

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