गैरसैंण प्रदर्शन के बाद धीरेंद्र प्रताप का सरकार पर हमला

पुलिस के दुरुपयोग और 56 हजार करोड़ के खर्च पर उठाए सवाल, कहा– जनता के पैसे का हिसाब दे सरकार

देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं प्रवक्ता धीरेंद्र प्रताप ने गैरसैंण में हुए विरोध प्रदर्शन से लौटने के बाद राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सरकार पर पुलिस का दुरुपयोग करने और विपक्ष के लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन करने का आरोप लगाया।

देहरादून पहुंचकर पत्रकारों से बातचीत में धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि गैरसैंण में सरकारी नीतियों के विरोध में आयोजित प्रदर्शन ने सरकार की “चूलें हिला दी हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन में शामिल कार्यकर्ताओं को जगह-जगह रोका गया और कई स्थानों पर उनके साथ मारपीट भी की गई, जो कि एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार्य नहीं है।

उन्होंने कहा कि यह घटनाएं राज्य में तानाशाही रवैये का स्पष्ट उदाहरण हैं। लोकतंत्र में विपक्ष को अपनी बात रखने और सरकार की नीतियों का विरोध करने का अधिकार है, लेकिन सरकार पुलिस के सहारे इस अधिकार को दबाने की कोशिश कर रही है।

धीरेंद्र प्रताप ने विधानसभा के भीतर भी सरकार के मंत्रियों के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस विधायकों द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब देते समय कुछ मंत्रियों ने जिस प्रकार की भाषा और व्यवहार अपनाया, वह लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुकूल नहीं है। उन्होंने कहा कि विधायकों को सवाल पूछने का पूरा अधिकार है, लेकिन मंत्रियों के जवाबों में अहंकार और बदतमीजी के तत्व साफ दिखाई दे रहे हैं।

उन्होंने मुख्यमंत्री से अपेक्षा जताई कि वे अपने मंत्रियों को संयमित और मर्यादित व्यवहार की सीख दें। प्रताप ने कहा कि यदि यही स्थिति बनी रही तो कांग्रेस कार्यकर्ताओं को सड़कों पर उतरकर इसका जवाब देना पड़ेगा।

उन्होंने कांग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन द्वारा पूछे गए सवाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका सवाल पूरी तरह शालीन और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप था, लेकिन जिस तरीके से मंत्री ने प्रतिक्रिया दी, वह किसी भी जनप्रतिनिधि के लिए शोभनीय नहीं है।

धीरेंद्र प्रताप ने राज्य सरकार पर 56 हजार करोड़ रुपये के बिना बजट संकल्पों के खर्च का गंभीर आरोप भी लगाया। उन्होंने इसे राज्य के इतिहास का सबसे बड़ा वित्तीय घोटाला बताते हुए मुख्यमंत्री से इस पूरे खर्च का विस्तृत हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि 56 हजार करोड़ रुपये कोई छोटी रकम नहीं है, बल्कि यह जनता की मेहनत की कमाई से बना राज्य का धन है। इस धन का उपयोग यदि नियमों और प्रक्रियाओं को दरकिनार कर किया गया है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

प्रताप ने यह भी कहा कि यदि इस मामले में विपक्ष के किसी व्यक्ति की भी भूमिका सामने आती है, तो उस पर भी समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए। कांग्रेस को इस पर कोई आपत्ति नहीं होगी, क्योंकि यह मामला जनता के पैसे और सार्वजनिक जवाबदेही से जुड़ा हुआ है।

उन्होंने कहा कि जनता के धन का दुरुपयोग किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता और यदि इस मामले में भ्रष्टाचार हुआ है तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।

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