नर्सिंग अभ्यर्थियों का आंदोलन 107वें दिन भी जारी, स्वाभिमान मोर्चा के समर्थन से मिली नई धार

देहरादून | प्रदेश में वर्षवार नर्सिंग भर्ती प्रणाली की बहाली की मांग को लेकर नर्सिंग अभ्यर्थियों का संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। एकता विहार धरना स्थल पर चल रहा यह आंदोलन आज 107वें दिन में प्रवेश कर गया। कड़ाके की ठंड और खराब मौसम के बावजूद अभ्यर्थी अपनी मांगों पर अडिग हैं। इस बीच, आंदोलन को उस समय बड़ी मजबूती मिली जब स्वाभिमान मोर्चा ने धरना स्थल पहुँचकर नर्सिंग एकता मंच को अपना पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की।

लंबे समय से अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों में सरकार की चुप्पी को लेकर अब भारी आक्रोश और निराशा है। अभ्यर्थियों का तर्क है कि भर्ती प्रक्रिया में हो रही देरी के कारण हजारों योग्य युवाओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है। कई अभ्यर्थी अब सरकारी सेवा के लिए निर्धारित उम्र सीमा पार करने की कगार पर हैं, जिससे उनकी वर्षों की मेहनत पर पानी फिरने का खतरा पैदा हो गया है।

आंदोलनकारियों ने सरकार के समक्ष स्पष्ट मांगें रखी हैं:

  • लंबित सभी बैचों को वर्षवार भर्ती प्रणाली (Year-wise Recruitment) के तहत तत्काल समायोजित किया जाए।
  • रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर इसी क्रम में भरा जाए ताकि पात्र युवाओं को न्याय मिल सके।
  • IPHS मानकों के अनुरूप नर्सिंग पदों पर नियमित वर्षवार भर्ती प्रक्रिया को पुनः बहाल किया जाए।

नर्सिंग कर्मियों के इस हक की लड़ाई में आज स्वाभिमान मोर्चा के अध्यक्ष बॉबी पंवार, उपाध्यक्ष त्रिभुवन चौहान और भूपेन्द्र कोरंगा ने शिरकत की। मोर्चा नेताओं ने नर्सिंग एकता मंच के संघर्ष को युवाओं और प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था के भविष्य से जुड़ा हुआ बताया। बॉबी पंवार ने स्पष्ट कहा कि नर्सिंग समुदाय की मांगें पूरी तरह न्यायसंगत हैं और मोर्चा हर कठिन परिस्थिति में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहेगा। इस समर्थन के बाद आंदोलनकारियों में नए उत्साह का संचार देखा जा रहा है।

धरना स्थल पर मूलभूत सुविधाओं के अभाव के बावजूद नवल पुंडीर, प्रवेश रावत, भास्कर, पवन, स्तुति, पपेंद्र, सिरा बंधानी, नीमा, प्रीति, लता और सोनिया सहित दर्जनों अभ्यर्थी डटे हुए हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक सरकार उनके पक्ष में कोई ठोस और सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक यह सत्याग्रह जारी रहेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस गंभीर मानवीय और भविष्य के मुद्दे पर तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है।

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