करन माहरा का तंज : ‘भाजपा ने कार्यकर्ताओं को ठगा, बाहरी नेताओं पर लगाया दांव’

देहरादून। प्रदेश भाजपा के भीतर इन दिनों जमीनी स्तर पर बेचैनी का माहौल है। पार्टी के वे कार्यकर्ता, जिन्होंने हर चुनाव में रात-दिन एक कर दिया, पोस्टर लगाए, जनसंपर्क किया और पार्टी को सत्ता तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई, अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। यह कहना है पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करण महारा का। उनका मानना है कि भाजपा ने उनकी वर्षों की निष्ठा और त्याग को नजरअंदाज करते हुए “बाहरी” नेताओं पर भरोसा जताया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मंत्रिमंडल विस्तार में पार्टी का यह रुख यह संकेत देता है कि भाजपा अब अपने स्वयं के जन्मे-पले कैडर पर भरोसा खो चुकी है। पार्टी के भीतर ही यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि सत्ता का गलियारा उन तक पहुंच रहा है जो हाल के दिनों में दूसरी पार्टियों से आए हैं, जबकि संगठन के लिए खून-पसीना बहाने वालों को सिर्फ भाषणों में याद किया जाता है।

इस पूरे प्रकरण पर पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं कांग्रेस कार्यकारिणी समिति (सीडब्ल्यूसी) सदस्य करन माहरा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि भाजपा की यह मानसिकता उसके ‘कार्यकर्ता-आधारित संगठन’ होने के दावे को झुठलाती है।

श्री माहरा ने कहा, “एक तरफ पार्टी कार्यकर्ताओं को संघर्ष, निष्ठा और त्याग का पाठ पढ़ाती है, वहीं दूसरी तरफ सत्ता में भागीदारी की बारी आने पर उन्हीं कार्यकर्ताओं को किनारे कर दिया जाता है। जो लोग सालों तक दरी बिछाते रहे, पोस्टर लगाते रहे, आज वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उनकी जगह उन नेताओं को मंत्री बनाया जा रहा है जिनकी जड़ें कभी कांग्रेस में रही हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि यह केवल कार्यकर्ताओं के साथ अन्याय नहीं है, बल्कि भाजपा के मूल चरित्र पर भी यह एक गंभीर सवाल है। “जब पार्टी को अपने ही कैडर पर भरोसा नहीं रहता, तो वह बाहर से आए नेताओं पर निर्भर होती जाती है। सत्ता के इस मोह ने पार्टी को उसके सिद्धांतों से समझौता करने पर मजबूर कर दिया है,” श्री माहरा ने कहा।

पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने चेताते हुए कहा, “जिस पार्टी की ताकत उसका जमीनी कार्यकर्ता होता है, जब वही खुद को उपेक्षित महसूस करने लगे, तो यह संगठन के लिए खतरे की घंटी है। केवल नारों और दावों से संगठन नहीं चलता, बल्कि वह कार्यकर्ताओं के सम्मान और विश्वास से चलता है। फिलहाल भाजपा यही दोनों चीजें अपने ही लोगों से छीनती नजर आ रही है।”

विधानसभा चुनावों से पहले हुए इस मंत्री विस्तार को राजनीतिक गलियारों में भाजपा की ‘अंदरुनी राजनीति’ के तौर पर देखा जा रहा है। फिलहाल, पार्टी की ओर से आधिकारिक तौर पर कार्यकर्ताओं के असंतोष पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन देखना यह होगा कि आगामी चुनावी समीकरणों को देखते हुए भाजपा नाराज कार्यकर्ताओं को किस तरह मनाती है और क्या यह फैसला पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को लंबे समय तक प्रभावित करेगा।

ऐसी और भी खबरें पढ़ने के लिए बने रहें merouttarakhand.in के साथ।
Subscribe our Whatsapp Channel
Like Our Facebook & Instagram Page
RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments