​यूएनआई दफ्तर पर कार्रवाई से आक्रोश: धीरेंद्र प्रताप बोले— ‘बिना नोटिस जबरिया बेदखली लोकतंत्र की हत्या और काला दिन’

 देहरादून। उतराखण्ड कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता और वरिष्ठ उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप ने कहा है कि देश की प्रतिष्ठित न्यूज एजेंसी यूनाइटेड न्यूज आफ इंडिया (यूएनआई)के दिल्ली दफ्तर को बिना किसी नोटिस दिये पुलिस के द्वारा जबरिया खाली करना लोकतंत्र की हत्या है और कल का दिन उन्होंने इतिहास का “काला दिन” बताया ।

  धीरेंद्र प्रताप ने शनिवार को यहां पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि शुक्रवार शाम एक अप्रत्याशित घटनाक्रम में समाचार एजेंसी यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया के दिल्ली परिसर को दिल्ली पुलिस के जवानों के साथ पत्रकारों कर्मचारियों पर बल प्रयोग करके खाली कराने का समाचार सुनकर हैरान हूं। उन्होंने कहा कि देश की सर्वश्रेष्ठ संवाद समिति के दफ्तर को बिना नोटिस दिये अचानक भारी पुलिस फोर्स के साथ खाली कराना लोकतंत्र की हत्या है।उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि मोदी जी के राज में जिस तरह से यूएनआई न्यूज रूम से वहां कार्यरत पत्रकारों को जबरिया बाहर करना अराजकता की श्रेणी हो सकती है। 

  गौरतलब है कि पिछले कई दशकों से संसद मार्ग के पास 9 रफी मार्ग पर स्थित परिसर से यूएनआई का संचालन हो रहा था। दिल्ली उच्च न्यायालय में शहरी विकास मंत्रालय द्वारा आवंटन रद्द होने के बाद लंबित याचिका पर शुक्रवार को फैसला आने के बाद कुछ घंटों बाद आनन फानन में कुछ सरकारी अधिकारी बिना किसी पूर्व नोटिस के दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के करीब 300 जवानों एवं अफसरों और कुछ वकीलों के साथ परिसर में घुस आये और वहां कार्यरत पत्रकारों एवं अन्य कर्मचारियों से तुरंत न्यूजरूम खाली कर परिसर से बाहर जाने का दबाव डालने लगे। जबकि उस समय खबरें प्रेषित करने का काम सबसे ज्यादा था।

धीरेंद्र प्रताप ने इसे कल दिन बताते हुए कहा कि दुनिया भर में प्रेस की आजादी के लिए बड़े-बड़े कदम उठाए जाते हैं जबकि इससे पहले की यू एन आई प्रबंधक मंडल हाई कोर्ट के फैसले के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में जाता है आनंद-खनन में यू एन आई के कार्यालय को खाली कराया गया है जो कि प्रजातंत्र के लिए कोई अच्छा संकेत नहीं है उन्होंने लोकतंत्र का चौथा पाया प्रेस को बताते हुए कहा कि यू एन आई दशकों से समाचारों के संकलन के लिए भारत नहीं नहीं विश्व भर में हिंदी गिरी और अंग्रेजी उर्दू की सबसे बड़ी एजेंसी मानी जाती है ऐसे में पुलिस का दुरुपयोग किया जाना अत्यंत दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण हैं

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