जेंडर पहचान पर नया विवाद : देहरादून में ट्रांसजेंडर समुदाय का तीखा विरोध

देहरादून। देहरादून में ट्रांसजेंडर समुदाय ने संसद में पेश किए गए “ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक 2026” के खिलाफ एकजुट होकर विरोध दर्ज कराया। समुदाय के लोगों और उनके समर्थकों ने इसे अपने अधिकारों और पहचान के लिए गंभीर खतरा बताते हुए सरकार से इसे तत्काल वापस लेने की मांग की।

रविवार को तिब्बती मार्केट के पास एक रेस्तरा में आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता में समुदाय के कई प्रमुख चेहरों ने अपनी बात रखी। इस दौरान ओशिन, मीरा और नैना सहित अन्य प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कहा कि यह विधेयक बिना उनकी राय लिए लाया गया है, जिससे उनके वर्षों के संघर्ष से हासिल अधिकारों पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक कानूनी मसला नहीं, बल्कि उनके अस्तित्व और सम्मान से जुड़ा विषय है।

प्रेस वार्ता में सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. स्मृति गुप्ता ने भी खुलकर समुदाय का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की पहचान उसके आंतरिक अनुभव से तय होती है, न कि केवल शारीरिक आधार पर। उनके अनुसार, प्रस्तावित बिल में इसी मूल सिद्धांत की अनदेखी की गई है, जो चिंताजनक है।

समुदाय के प्रतिनिधियों ने यह भी बताया कि नए प्रावधानों के तहत जेंडर पहचान को मान्यता देने का अधिकार व्यक्ति से हटाकर एक सरकारी मेडिकल बोर्ड को सौंपने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना था कि इससे प्रक्रिया जटिल और अपमानजनक हो सकती है, क्योंकि लोगों को अनावश्यक चिकित्सा परीक्षणों और औपचारिकताओं से गुजरना पड़ सकता है।

वक्ताओं ने 2014 के सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि उस निर्णय ने “स्व-अनुभूत जेंडर पहचान” को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी थी, जबकि यह संशोधन उस भावना के विपरीत नजर आता है। उनका यह भी आरोप था कि प्रस्तावित कानून ट्रांसजेंडर समुदाय की विविधता को सीमित करता है और सभी वर्गों को समान रूप से शामिल नहीं करता।

मिसफिट ट्रांसजेंडर यूथ फाउंडेशन से शमन गुप्ता और वॉयस ऑफ वॉरियर फाउंडेशन से ओशिन सरकार ने भी इस मौके पर अपनी बात रखते हुए कहा कि यह बिल समुदाय को सशक्त करने के बजाय उन्हें और अधिक प्रशासनिक दायरे में बांध देगा। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस पर पुनर्विचार किया जाए और समुदाय के साथ संवाद स्थापित किया जाए।

वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि इस विधेयक को बिना जरूरी संशोधनों के आगे बढ़ाया गया, तो इसके दूरगामी नकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल विरोध तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अपने अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए आगे भी जारी रहेगा।

अंत में, सभी प्रतिनिधियों ने एक स्वर में सरकार से अपील की कि वह इस मुद्दे को संवेदनशीलता के साथ ले और ट्रांसजेंडर समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए कोई भी अंतिम निर्णय ले। साथ ही, उन्होंने समाज के सभी वर्गों से इस मुद्दे पर जागरूकता और समर्थन की अपील की।

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