देहरादून। उत्तराखंड में संस्कृति और लोक परंपराओं का एक भव्य आयोजन होने जा रहा है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय तथा उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, पटियाला के संयुक्त प्रयास से गढ़वाल मंडल में छह दिवसीय ‘वसंतोत्सव 2026’ का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन 26 मार्च से 30 मार्च के बीच विभिन्न स्थानों पर होगा।
इस उत्सव में देशभर से करीब 100 कलाकार भाग लेंगे। राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के कलाकार अपनी लोक संस्कृति को लोकगीतों और पारंपरिक नृत्यों के जरिए प्रस्तुत करेंगे। इसके माध्यम से भारत की सांस्कृतिक विविधता को रंगमंच पर जीवंत किया जाएगा।
आयोजन में संस्कार सांस्कृतिक एवं पर्यावरण संरक्षण समिति, नयालखोला अल्मोड़ा सहयोगी संस्था के रूप में जुड़ी हुई है। इसी कड़ी में 27 मार्च 2026 को देहरादून के नेहरू कॉलोनी स्थित एक संस्थान या अस्पताल में विशेष एक दिवसीय कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी है, जिसके लिए आयोजकों ने स्थानीय स्तर पर सहयोग की अपील की है।
प्रस्तुत किए जाने वाले प्रमुख लोकनृत्य:
· हरियाणा का फाग नृत्य – होली और बसंत के रंगों को दर्शाता है।
· पंजाब का भांगड़ा – ढोल की थाप पर ऊर्जा और उत्साह का संचार करता है।
· कश्मीर का रौफ नृत्य – सादगी और सुंदरता से शांति का संदेश देता है।
· राजस्थान का भवाई नृत्य – महिलाओं द्वारा सिर पर घड़े रखकर संतुलन के अद्भुत कौशल का प्रदर्शन।
· उत्तर प्रदेश का मयूर नृत्य – राधा-कृष्ण की लीलाओं और प्रकृति की सुषमा को उकेरता है।
· गढ़वाल का पांडव (पौड़ा) नृत्य – महाभारत की कथाओं को स्थानीय संस्कृति और आस्था के साथ प्रस्तुत करता है।
आयोजन की सफलता के लिए आयोजकों ने मंच, दर्शक दीर्घा, भोजन और लाइट-साउंड जैसी व्यवस्थाओं में सहयोग की मांग की है। यह वसंतोत्सव सांस्कृतिक आदान-प्रदान का माध्यम तो होगा ही, साथ ही ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को भी साकार करेगा।

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