“ध्वस्त होती लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को मजबूत करने की मांग”: जन संघर्ष मोर्चा ने निर्वाचन आयोग से लगाई गुहार

चुनाव में पूंजीपतियों का बढ़ता दखल, गरीब हो रहा चुनाव से दूर — रघुनाथ सिंह नेगी ने सौंपा ज्ञापन

देहरादून। लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में आ रही गिरावट और चुनावी प्रक्रिया में पूंजीपतियों के बढ़ते दखल को लेकर जन संघर्ष मोर्चा ने निर्वाचन आयोग से व्यापक सुधारों की गुहार लगाई है। संगठन के अध्यक्ष एवं जीएनवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तराखंड श्री वीबीआरसी पुरुषोत्तम से मुलाकात कर मुख्य चुनाव आयुक्त, भारत सरकार को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में चुनावी प्रक्रिया में व्यापक सुधार, पूंजीपतियों के बढ़ते दखल, टीनएजर्स को नशे से बचाने सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया गया है। नेगी ने आयोग से इन तथ्यों को भारत सरकार के संज्ञान में लाने का भी आग्रह किया।

नेगी ने कहा कि विगत कुछ वर्षों से लोकसभा, विधानसभा व अन्य चुनावों में पूंजीपतियों का दखल तेजी से बढ़ा है। पैसे के दम पर जनप्रतिनिधि बनने की होड़ ने गरीबों और समाज की आखिरी पंक्ति में बैठे व्यक्ति को न्याय से वंचित कर दिया है।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि यही हाल रहा तो गरीब की आवाज को सुनने वाला कोई नहीं बचेगा। पूंजीपतियों का उद्देश्य जनसेवा न होकर चुनाव में लगाई गई रकम को कई गुणा बढ़ाना मात्र होता है, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं ध्वस्त हो रही हैं।

जन संघर्ष मोर्चा ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुधार के लिए निम्नलिखित मांगें रखीं:

  1. पोलिंग स्टेशन के बाहर लगने वाले बस्तों (स्टॉल) पर लगे पूर्ण प्रतिबंध
    नेगी ने कहा कि पोलिंग के दौरान पोलिंग स्टेशन के बाहर लगने वाले स्टॉल की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि सरकार द्वारा हर पोलिंग स्टेशन पर बीएलओ तैनात हैं और नाम की पर्चियां घर-घर पहुंच जाती हैं। इन बस्तों को खत्म किया जाना चाहिए।
  2. वोट डालने की उम्र 18 से बढ़ाकर 21 साल की जाए
    मोर्चा ने मतदाता की उम्र पूर्व की भांति 21 वर्ष करने की मांग की है। नेगी के अनुसार, 18-19 वर्ष के टीनएजर्स को प्रत्याशी हर तरह के नशे परोसकर बर्बाद कर रहे हैं, जिससे समाज में नशा करने वाले युवाओं की संख्या खतरनाक रूप से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि 18 वर्ष का युवा आईटी, विज्ञान आदि हर क्षेत्र में झंडा तो गाड़ सकता है, लेकिन जनसरोकार और सामाजिकता की बारीकियों को समझने में कई दशक लग जाते हैं।
  3. स्कूटर/मोटरसाइकिल रैलियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए
    चुनाव के दौरान रैलियों में मोटरसाइकिल और स्कूटरों के अंधाधुंध इस्तेमाल को युवाओं को बर्बाद करने वाला बताते हुए इन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गई।
  4. प्रत्याशियों द्वारा युवाओं को नशे का शिकार बनाने पर रोक
    ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि चुनाव के समय प्रत्याशी युवाओं का इस्तेमाल करते हैं और उन्हें हर प्रकार का नशा परोसा जाता है। इस प्रवृत्ति पर सख्ती से अंकुश लगाने की आवश्यकता है।

नेगी ने कहा कि 18 साल को मतदान की उम्र निर्धारित किए जाने से एक तरह से परिपक्व लोकतंत्र स्थापित हो रहा है, यानि एक 18 साल का युवा लोकसभा और विधानसभा चुनाव में प्रतिभाग कर अप्रत्यक्ष तौर पर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का चुनाव करता है। उन्होंने इस व्यवस्था पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे पुनः परखे जाने की आवश्यकता बताई।

जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि पूंजीपतियों के चुनाव में दखल के चलते गरीब और मध्यम वर्गीय जनता को इंसाफ नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि समय रहते लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए चुनावी प्रक्रिया में गुणात्मक सुधार अत्यंत आवश्यक है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात के दौरान नेगी ने ज्ञापन सौंपकर इन सभी मांगों को आयोग के समक्ष रखा और शीघ्र ही इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाने की अपील की।

ऐसी और भी खबरें पढ़ने के लिए बने रहें merouttarakhand.in के साथ।
Subscribe our Whatsapp Channel
Like Our Facebook & Instagram Page
RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments