28 जोखिमभरे नदी तटों पर चैनलाइजेशन को सशर्त स्वीकृति, भूस्खलन व बाढ़ सुरक्षा के लिए लिए गए अहम फैसले
जनहित के कार्य समयबद्ध ढंग से पूरे करने के निर्देश, विभागों से मांगे गए नए प्रस्ताव
देहरादून। जनपद में आपदा प्रबंधन को लेकर जिला प्रशासन ने सक्रियता बढ़ा दी है। जिलाधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में शुक्रवार को ऋषिपर्णा सभागार में आयोजित जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण समिति की बैठक में आपदा संभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में प्रस्तावित कई महत्वपूर्ण सुरक्षात्मक कार्यों को सशर्त मंजूरी प्रदान की गई। बैठक में नदियों के चैनलाइजेशन, ड्रेजिंग, रिवर ड्रेसिंग और भूस्खलन न्यूनीकरण जैसे कार्यों को जनहित और जनसुरक्षा के लिहाज से अत्यंत जरूरी मानते हुए प्राथमिकता पर पूरा कराने के निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी ने बैठक में स्पष्ट कहा कि आपदा न्यूनीकरण से जुड़े कार्य सुधारात्मक प्रकृति के होते हैं, जिनका उद्देश्य संभावित नुकसान को पहले ही कम करना है। ऐसे कार्यों को सुरक्षा और जनहित के दृष्टिकोण से प्राथमिकता के आधार पर कराया जाना जरूरी है। उन्होंने बताया कि तहसील स्तर और विभिन्न विभागों से प्राप्त प्रस्तावों का समिति द्वारा परीक्षण किया गया है तथा नदियों के चैनलाइजेशन और ड्रेजिंग से संबंधित कई प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान कर दी गई है।
उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि स्वीकृत कार्यों को समयबद्ध रूप से पूरा किया जाए, ताकि मानसून से पहले संवेदनशील क्षेत्रों में आवश्यक सुरक्षा प्रबंध सुनिश्चित किए जा सकें। जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि यदि किसी विभाग के पास अतिरिक्त प्रस्ताव, सुझाव या नए आपदा न्यूनीकरण कार्यों की आवश्यकता हो, तो उन्हें शीघ्र समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। साथ ही, भविष्य में समिति की बैठकें नियमित अंतराल पर आयोजित की जाएंगी ताकि आपदा प्रबंधन से जुड़े मामलों की लगातार समीक्षा हो सके।

बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) केके मिश्रा ने बताया कि पूर्व में आपदाग्रस्त और आपदा संभावित क्षेत्रों के संबंध में विभिन्न विभागों से प्रस्ताव मांगे गए थे। इनमें नदी चैनलाइजेशन, रिवर ड्रेसिंग तथा आरक्षित वन क्षेत्रों में भूस्खलन उपचार से जुड़े कार्य शामिल हैं। उन्होंने जानकारी दी कि इन प्रस्तावों को मार्च माह में ही स्वीकृति देने का उद्देश्य यह है कि विभागों को कार्य निष्पादन के लिए पर्याप्त समय मिल सके और मानसून से पहले संवेदनशील स्थलों पर राहत व सुरक्षा के इंतजाम किए जा सकें।
समिति ने हरिपुर कालसी क्षेत्र में यमुना नदी तट पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए घाट निर्माण के लिए नदी चैनलाइजेशन कार्य को महत्वपूर्ण माना। इसके अलावा सहिया क्षेत्र के अंतर्गत कालसी-चकराता मोटर मार्ग पर जजरेड स्थान में स्थित क्रॉनिक लैंडस्लाइड जोन में संरचनात्मक भूस्खलन न्यूनीकरण कार्यों को भी जरूरी मानते हुए सशर्त मंजूरी दी गई। जनपद के विभिन्न नदी तटों के 28 संवेदनशील स्थलों पर मानसून के दौरान संभावित नुकसान की आशंका को देखते हुए चैनलाइजेशन और सुरक्षात्मक कार्यों को भी स्वीकृति प्रदान की गई।
बैठक में कुछ अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर भी विचार किया गया। इनमें राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-507 के किमी 13-14 पर यमुना नदी स्थित सेतु पर एबटमेंट स्कप्पर निर्माण, नदी प्रवाह के चैनलाइजेशन, दोनों तटों पर कर्टेन वॉल तथा अन्य सुरक्षात्मक कार्य शामिल हैं। इसके अलावा किमी 24 बोसाना और किमी 26 व्यासी में भूस्खलन उपचार, भानियावाला-ऋषिकेश मार्ग पर चंद्रभागा नदी किनारे रिवर ड्रेसिंग तथा जाखन ब्रिज के अपस्ट्रीम में जमा मलबा हटाने जैसे कार्यों को भी गंभीरता से लिया गया।
इन प्रस्तावों के लिए समिति ने संबंधित उपजिलाधिकारी, प्रभागीय वनाधिकारी, अधिशासी अभियंता और अन्य विभागीय अधिकारियों की एक संयुक्त समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। यह समिति स्थलीय निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी, जिसके आधार पर आगे की स्वीकृति और कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। प्रशासन का मानना है कि जमीनी निरीक्षण के बाद लिए गए निर्णय अधिक प्रभावी और व्यावहारिक होंगे।

बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष एवं समिति की सह-अध्यक्ष सुखविंदर सिंह कौर, अपर जिलाधिकारी (वि.रा.) केके मिश्रा, प्रभागीय वनाधिकारी नीरज कुमार, लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता ओपी सिंह, राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिशासी अभियंता सुरेश तोमर, क्षेत्राधिकारी विवेक कोटियाल, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी ऋषभ कुमार सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे। वहीं, उपजिलाधिकारी और विभिन्न विभागों के अन्य अधिकारी वर्चुअल माध्यम से बैठक से जुड़े।
जिला प्रशासन के इस निर्णय को आगामी मानसून सीजन से पहले एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम माना जा रहा है। संवेदनशील क्षेत्रों में समय रहते सुरक्षात्मक कार्य शुरू होने से न केवल जनहानि और संपत्ति के नुकसान को कम किया जा सकेगा, बल्कि आपदा प्रबंधन तंत्र को भी अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

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