देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने चारधाम यात्रा 2026 की तैयारियों को और मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसला लिया है। रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा (2018 बैच के आईएएस अधिकारी) को बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) बनाया गया है। यह अतिरिक्त प्रभार उन्हें तत्काल प्रभाव से दिया गया है।
यह फैसला इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि चारधाम यात्रा की शुरुआत अब सिर्फ कुछ हफ्ते दूर है। अक्षय तृतीया (19 अप्रैल 2026) को यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट खुलेंगे, जबकि केदारनाथ 22 अप्रैल और बद्रीनाथ 23 अप्रैल को खुलेगा। लाखों श्रद्धालुओं की आमद से पहले मंदिर समिति की व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त करने की जिम्मेदारी अब एक अनुभवी आईएएस अधिकारी के कंधों पर आ गई है।
क्यों हुआ यह बदलाव?
हाल ही में बदरी-केदार मंदिर समिति के पूर्व सीईओ विजय थपलियाल को विवादों के बीच हटा दिया गया था। उनके कार्यकाल में केदारनाथ से जुड़े कुछ मुद्दों (रूप छड़ी प्रथा, पुजारी नियुक्ति आदि) को लेकर शिकायतें आई थीं, जिसके बाद शासन ने तुरंत उनकी प्रतिनियुक्ति समाप्त कर दी और उन्हें मूल विभाग कृषि उत्पादन मंडी में वापस भेज दिया।
इस खाली पड़े महत्वपूर्ण पद पर अब IAS अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार सौंपकर सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यात्रा से पहले मंदिर समिति में सुधार और पारदर्शिता पर जोर दिया जाएगा।
विशाल मिश्रा कौन हैं?
विशाल मिश्रा वर्तमान में रुद्रप्रयाग जिले की प्रशासनिक बागडोर संभाल रहे हैं। केदारनाथ धाम उनके जिले में स्थित होने के कारण वे पहले से ही यात्रा तैयारियों से जुड़े रहे हैं। उनकी नियुक्ति को इसलिए भी रणनीतिक माना जा रहा है क्योंकि वे क्षेत्र की भौगोलिक, धार्मिक और प्रशासनिक चुनौतियों से अच्छी तरह वाकिफ हैं।
व्यापक संदर्भ
यह बदलाव उस समय हुआ है जब राज्य में ब्यूरोक्रेटिक फेरबदल की चर्चाएं भी जोरों पर हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तराखंड दौरे की संभावना और चारधाम यात्रा की भारी भीड़ को देखते हुए सरकार हर स्तर पर तैयारियां तेज कर रही है। मंदिर समिति के अधीन आने वाले मंदिरों में व्यवस्था, सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और श्रद्धालुओं की सुविधा सुनिश्चित करना अब विशाल मिश्रा की प्राथमिक जिम्मेदारी होगी।
पेंडिंग मुद्दों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर लगाई गई रोक, हेली सेवा, भीड़ प्रबंधन और आधारभूत सुविधाओं का विकास भी शामिल है।
सरकार का यह कदम चारधाम यात्रा को सुचारु, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। पेंडिंग बड़े तबादलों के बीच यह पहला बड़ा कदम माना जा रहा है, जिसके बाद और बदलाव भी संभव हैं।
यात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण पहले ही शुरू हो चुका है और श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह दिख रहा है। अब देखना यह होगा कि नई कमान के साथ बदरी-केदार मंदिर समिति कैसे इन चुनौतियों का सामना करती है और लाखों भक्तों को निर्बाध दर्शन की सुविधा दे पाती है।

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