राज्य कर कर्मचारियों का सचिवालय कूच, मांगों पर बनी सहमति; चेतावनी—समय पर समाधान न हुआ तो होगा बड़ा आंदोलन

देहरादून। उत्तराखंड राज्य कर मिनिस्ट्रियल स्टाफ एसोसिएशन के बैनर तले आज प्रदेशभर के राज्य कर विभाग के कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर राजधानी देहरादून में सचिवालय कूच किया। यह कूच शासन स्तर पर लंबे समय से लंबित दो प्रमुख मांगों—विभागीय ढांचे के पुनर्गठन और राज्य कर अधिकारी नियमावली में संशोधन—पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होने के विरोध में आयोजित किया गया।

सुबह लगभग 10 बजे राज्य कर विभाग के कर्मचारी परेड ग्राउंड में एकत्र हुए, जहां से 11:30 बजे के आसपास वे संगठित रूप से सचिवालय की ओर कूच के लिए रवाना हुए। इस दौरान प्रदेश के विभिन्न जनपदों से सैकड़ों कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। हालांकि, पुलिस प्रशासन ने कर्मचारियों को पुलिस मुख्यालय के पास बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया।

इसके बाद संगठन के प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए वित्त सचिव आईएफएस दिलीप जावलकर के साथ बैठक हेतु आमंत्रित किया गया। इस वार्ता में प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी, प्रदेश महामंत्री इंद्रजीत सिंह, वरिष्ठ उपाध्यक्ष विशाल अग्रवाल तथा संगठन मंत्री सुरेश शर्मा समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

वार्ता के दौरान कर्मचारियों की दोनों प्रमुख मांगों पर सकारात्मक सहमति बनी। पहले बिंदु पर यह तय किया गया कि विभागीय ढांचे के पुनर्गठन के लिए विभागाध्यक्ष (आयुक्त, राज्य कर) के साथ शासन स्तर पर शीघ्र बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप पदों की समीक्षा कर निर्णय लिया जाएगा। वहीं, दूसरे बिंदु—राज्य कर अधिकारी नियमावली में संशोधन—पर वित्त सचिव द्वारा पूर्ण सहमति व्यक्त की गई।

वार्ता के बाद प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी ने स्पष्ट कहा कि आज की बैठक में शासन द्वारा जो आश्वासन दिया गया है, यदि उस पर समयबद्ध कार्रवाई नहीं होती है, तो संगठन भविष्य में और बड़े स्तर पर आंदोलन करने को बाध्य होगा।

इस सचिवालय कूच कार्यक्रम में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष अरुण पांडे, संरक्षक ओमवीर सिंह, ठाकुर शेर सिंह, रविंद्र सिंह चौहान, सुरेश चंद्र डबराल, विकास नेगी सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी भी शामिल रहे। इसके अलावा राज्य कर मिनिस्ट्रियल स्टाफ एसोसिएशन की प्रांतीय कार्यकारिणी के पदाधिकारी—प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी, महामंत्री इंद्रजीत सिंह, संरक्षक भरत सिंह राणा, प्रांतीय सलाहकार मनमोहन नेगी, विशिष्ट उपाध्यक्ष विशाल अग्रवाल, उपाध्यक्ष उमेश सिंह बिष्ट, संयुक्त मंत्री रविंद्र कुमार सैनी, संगठन मंत्री सुरेश शर्मा, प्रवक्ता सुनील निरंजन एवं प्रांतीय मंत्री सोनू—सहित विभिन्न शाखाओं के अध्यक्ष और मंत्री बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में देहरादून, रुद्रपुर, काशीपुर, ऋषिकेश, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, खटीमा, रुदकी, विकासनगर, हरिद्वार समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए शाखा पदाधिकारियों और कर्मचारियों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया, जिससे आंदोलन को व्यापक समर्थन मिला।

उल्लेखनीय है कि राज्य कर विभाग प्रदेश के कुल राजस्व में लगभग 50 प्रतिशत से अधिक योगदान देता है, इसके बावजूद विभागीय कर्मचारियों के ढांचे का पुनर्गठन वर्ष 2006-07 के बाद से अब तक नहीं किया गया है। वहीं अधिकारियों के पदों में लगातार वृद्धि होती रही है, जिससे विभागीय संतुलन प्रभावित हुआ है। वर्तमान में अधिकारियों के स्वीकृत पदों की संख्या 481 तक पहुंच चुकी है, जबकि कर्मचारियों के स्वीकृत पद केवल 777 पर स्थिर हैं, जिनमें पिछले दो दशकों से कोई वृद्धि नहीं हुई है।

इसके अतिरिक्त, वर्ष 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद पंजीकृत व्यापारियों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है—करीब 1 लाख से बढ़कर अब लगभग 2 लाख 13 हजार तक पहुंच चुकी है। यानी व्यापारियों की संख्या में 113 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिससे कर्मचारियों पर कार्यभार अत्यधिक बढ़ गया है। इस असंतुलन के कारण कर्मचारियों में मानसिक दबाव और असंतोष भी बढ़ रहा है।

कर्मचारियों का कहना है कि विभाग में वर्तमान स्थिति पिरामिडीय संरचना के विपरीत हो गई है, जहां अधिकारियों की संख्या तेजी से बढ़ी है, लेकिन कर्मचारियों की संख्या में वृद्धि नहीं हुई। इसी कारण संगठन पिछले छह महीनों से लगातार विभागीय ढांचे के पुनर्गठन और नई नियमावली लागू करने की मांग को लेकर संघर्षरत है।

कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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