चारधाम यात्रा से पहले अधूरे हैं निर्माण कार्य, सरकार परंपराओं का नहीं कर रही पालन : लखपत सिंह बुटोला

बद्रीनाथ विधायक ने उठाईं कई अहम समस्याएं, तप्त कुंड व ब्रह्मकपाल को बताया खतरे में; ऑनलाइन पंजीकरण पोर्टल हमेशा खुला रखने की मांग

देहरादून। प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय, देहरादून में बुधवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में बद्रीनाथ विधायक लखपत सिंह बुटोला ने चारधाम यात्रा की तैयारियों को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि धामी सरकार चारधाम यात्रा को लेकर गंभीर नहीं है, निर्माण कार्य अधूरे हैं और आधारभूत सुविधाओं की नितांत कमी है।

बुटोला ने कहा कि 19 अप्रैल 2026 को अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर चारधामों के कपाट खुलने जा रहे हैं, लेकिन तैयारियां बेहद अधूरी हैं। उन्होंने बताया कि वह 5 अप्रैल को बद्रीनाथ गए थे, जहां यात्रा शुरू होने में मात्र कुछ ही दिन शेष हैं, लेकिन प्राधिकरण के कार्य अभी भी अधूरे पड़े हैं।

बुटोला ने कहा कि चारधाम परियोजना प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की निगरानी में होने के बावजूद कार्यों की गुणवत्ता और समयसीमा में घोर लापरवाही देखने को मिल रही है। हजारों श्रद्धालु पहले ही दिन बद्रीनारायण के दर्शन करेंगे, लेकिन राज्य सरकार ने अभी तक कार्य पूरे नहीं किए हैं।

विधायक ने आरोप लगाया कि चारधाम यात्रा को लेकर होने वाली बैठकों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों व विधायकों को आमंत्रित नहीं किया जाता, जिससे मूल समस्याएं उठ ही नहीं पातीं और उनका समाधान भी नहीं हो पाता।

बुटोला ने सबसे गंभीर मुद्दा उठाते हुए कहा कि बद्रीनाथ धाम में हो रहे निर्माण कार्यों के कारण अलकनंदा नदी की धारा ब्रह्मकपाल और तप्त कुंड की ओर मोड़ दी गई है। लगभग 1.5 किलोमीटर तक नदी की चौड़ाई मात्र 3 मीटर तक सीमित कर दी गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे ब्रह्मकपाल, तप्त कुंड और बद्रीनारायण मंदिर को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

उन्होंने बताया कि मास्टर प्लान के तहत बद्रीनाथ प्राधिकरण ने मंदिर परिसर के चारों ओर की बस्तियों को तोड़कर खंडहर बना दिया है, लेकिन समय सीमा बीत जाने के बाद भी सौंदर्यीकरण नहीं हो पाया है। मंदिर जाने वाला पथ आधा-अधूरा है, देव डोली का पौराणिक रास्ता अभी शुरू ही नहीं हुआ है, और पौराणिक पंचधाराओं का रखरखाव नहीं हो रहा है।

बुटोला ने मांग करते हुए कहा कि चारधाम यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या निर्धारण तुरंत हटाया जाए, क्योंकि सनातन धर्म में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। ऑनलाइन पंजीकरण पोर्टल हमेशा खुला रहे और ऑफलाइन पंजीकरण की भी व्यवस्था की जाए। वाहन चालकों को कम से कम छह माह का ग्रीन कार्ड दिया जाए और यात्रियों को जगह-जगह बैरिकेट्स पर न रोका जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि चारधाम मार्ग पर स्थित होटल, ढाबों और रेस्तरां को गैस आपूर्ति की समुचित व्यवस्था की जाए, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो। साथ ही स्थानीय लोगों एवं व्यापारियों की 10 सूत्रीय मांगों को शीघ्र पूरा किया जाए।

पत्रकार वार्ता में डॉ. प्रतिमा सिंह, प्रदीप थपलियाल, मुकेश नेगी, नरेशानंद नौटियाल, पवन नेगी और नैन सिंह भंडारी आदि उपस्थित रहे।

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