देहरादून। राजधानी के कलेक्ट्रेट परिसर में सोमवार को आयोजित जन दर्शन कार्यक्रम उस समय मानवीय संवेदनाओं का केंद्र बन गया, जब जिलाधिकारी सविन बंसल ने सरकारी फाइलों से इतर जाकर असहाय और गरीब फरियादियों की समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया। मुख्यमंत्री के संकल्पों से प्रेरित इस जनता दरबार में न केवल 239 शिकायतों की सुनवाई हुई, बल्कि जिला प्रशासन ने विधवाओं और बुजुर्गों के बकाया बिलों और फीस का भुगतान अपने स्तर पर करने का अभूतपूर्व निर्णय लिया।
जनता दरबार में शिवलोक कॉलोनी की कनिष्का ने अपनी व्यथा सुनाई कि पति की मृत्यु और पिता के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद वह हाउस टैक्स भरने में असमर्थ हैं। जिलाधिकारी सविन बंसल ने तत्काल प्रभारी अधिकारी को राइफल क्लब फंड से कनिष्का का 47,230 रुपये का गृहकर जमा करने के निर्देश दिए। इसी तरह, 66 वर्षीय विधवा नीलम की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उनके 18,335 रुपये के जल मूल्य बिल का निपटारा किया गया। प्रशासन ने सेटलमेंट के बाद शेष 12,776 रुपये की धनराशि खुद वहन करने का फैसला लिया।


जनता दरबार में सबसे अधिक मामले स्कूल फीस माफी से संबंधित आए। जिलाधिकारी ने ‘प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा’ के तहत दर्जनों गरीब और विधवा महिलाओं की पुत्रियों की शिक्षा का जिम्मा उठाने के निर्देश दिए। इनमें कैंसर पीड़ित धीरज सिंह रावत की पुत्री, दिव्यांग रजनी कश्यप की बेटी और विधवा हसीना, कविता, नसीम व पायल गोयल की पुत्रियों की फीस शामिल है। कांवली रोड निवासी विधवा किरण धीमान के पुत्र की फीस माफी के लिए जिलाधिकारी ने स्कूल प्रबंधन को विशेष पत्र लिखने और किरण को रोजगार दिलाने के लिए प्रोबेशन अधिकारी को निर्देशित किया।
सचिवालय और कलेक्ट्रेट की इस जनसुनवाई में केवल आश्वासन नहीं, बल्कि तत्काल आर्थिक सहायता भी दिखी। देहरादून निवासी गंगाराम की पुत्री के विवाह के लिए जिलाधिकारी ने मौके पर ही 50,000 रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की। वहीं, उपचार के लिए मालदेवता निवासी संध्या रमोला के प्रकरण को मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष में भेजने के निर्देश दिए।
अजबपुर कलाम की जरीना बानो के मामले में जिलाधिकारी का सख्त रुख देखने को मिला। पुत्र द्वारा घर से बेदखल किए जाने की शिकायत पर जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों को भरण-पोषण अधिनियम के तहत तत्काल वाद दायर करने के निर्देश दिए।


भूमि विवाद, अवैध कब्जे और राशन कार्ड से जुड़ी 239 शिकायतों को सुनते हुए जिलाधिकारी सविन बंसल ने सभी विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट किया कि निस्तारण केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर गुणवत्तापूर्ण होना चाहिए। बैठक में अपर जिलाधिकारी के.के. मिश्रा, संयुक्त मजिस्ट्रेट राहुल आनंद और सभी उपजिलाधिकारी मौजूद रहे।
प्रशासन का ध्येय है कि न्याय अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुँचे। विधवा महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों की शिक्षा में आ रही आर्थिक कठिनाइयों को दूर करना हमारी प्राथमिकता है।
— सविन बंसल, जिलाधिकारी देहरादून

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