ऋषिकेश विवाद : मनजीत जौहर मामले में सामने आए चौंकाने वाले पुराने रिकॉर्ड, जांच की दिशा बदली

जौहर परिवार पर लगे आरोपों की क्या है सच्चाई? जेल में बंद आरोपी पर नई FIR ने खड़े किए सवाल

ऋषिकेश : 18 अप्रैल की उस सड़क दुर्घटना का सच क्या है? जौहर परिवार के खिलाफ आरोपों पर गहराया संशय

ऋषिकेश ।  तीर्थनगरी ऋषिकेश में मशहूर व्यवसायी मनजीत जौहर और उनके बेटे मानव जौहर से जुड़ा कानूनी विवाद अब एक ऐसी भूलभुलैया बन गया है, जहां हर दिन नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं।

सजल खुराना और उनकी पत्नी नेहा तोमर खुराना (उर्फ समायरा) के बीच चल रही तलाक की कानूनी लड़ाई ने अब एक हाई-प्रोफाइल आपराधिक रंग ले लिया है। इस मामले में दुष्कर्म जैसे संगीन आरोपों के बाद पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) कड़ियों को जोड़ने में जुटी है, लेकिन ताजा घटनाक्रम ने शिकायतकर्ता के दावों पर ही सवालिया निशान लगा दिए हैं।

पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ 18 अप्रैल की उस घटना से आया है, जिसे लेकर पुलिस में नई शिकायत दर्ज कराई गई थी। स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, उस दिन नेहा तोमर एक सामान्य सड़क दुर्घटना का शिकार हुई थीं, जहां मौके पर मौजूद लोगों ने उनकी मदद की और मामला शांत हो गया। हैरत की बात यह है कि इस घटना के बाद दर्ज कराई गई एफआईआर में मनजीत जौहर और मानव जौहर के साथ-साथ कुशाग्र शर्मा का नाम भी घसीटा गया। गौर करने वाली बात यह है कि कुशाग्र शर्मा उस वक्त पहले से ही जेल की सलाखों के पीछे न्यायिक हिरासत में था। जेल में बंद व्यक्ति पर बाहर हमला करने का आरोप लगने के बाद जांच टीम अब इस शिकायत की मंशा को लेकर गंभीर है।

जांच के रडार पर केवल वर्तमान आरोप ही नहीं, बल्कि नेहा तोमर का पुराना रिकॉर्ड भी है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि 12 मार्च को एक गाड़ी चोरी की रहस्यमयी शिकायत दर्ज हुई थी, जिसे बाद में 25 मार्च को बहादराबाद के पास लावारिस हालत में बरामद किया गया।

पुलिस इस बात की भी गहराई से तफ्तीश कर रही है कि इस वाहन चोरी के नाटक के पीछे असली खिलाड़ी कौन था। साथ ही, वैवाहिक विवाद के दौरान अपनी ही सास के साथ हुए झगड़े और उसके बाद संपत्ति से बेदखल किए जाने के दस्तावेजों ने कोर्ट में मामले को और भी संवेदनशील बना दिया है।
इस विवाद में एक नया और विवादित एंगल ‘पहाड़ी स्वाभिमान’ का दिया जा रहा है।

सोशल मीडिया और इंटरव्यूज में इसे पहाड़ी लड़कियों के शोषण से जोड़कर पेश किया जा रहा है, जबकि हकीकत यह है कि शिकायतकर्ता स्वयं मूल रूप से पहाड़ी समुदाय से ताल्लुक नहीं रखतीं। जानकारों का मानना है कि मामले को क्षेत्रीय रंग देना असल जांच से ध्यान भटकाने की कोशिश हो सकती है। इसी बीच, अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए नेहा तोमर को सोशल मीडिया पर परिवार के खिलाफ किसी भी तरह की आपत्तिजनक और मानहानि वाली टिप्पणी करने से प्रतिबंधित कर दिया है।

मामले में एंट्री हुई है ऋषिकेश के ही रहने वाले जगजीत सिंह की, जो शिकायतकर्ता के सबसे मुखर समर्थक बनकर उभरे हैं। लेकिन जगजीत सिंह का अपना अतीत ही विवादों के घेरे में है।

2016 के पुलिस रिकॉर्ड खंगालने पर पता चलता है कि जगजीत पर अलगाववादी विचारधारा को बढ़ावा देने और देशविरोधी सामग्री सोशल मीडिया पर साझा करने के गंभीर आरोप लग चुके हैं। उस समय उन पर देशद्रोह जैसी धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें सलाखों के पीछे भेजा गया था। अब एक आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति का इस केस में सक्रिय होना जांच अधिकारियों के कान खड़े कर रहा है।

साक्ष्यों के नाम पर पेश की गई एक ऑडियो रिकॉर्डिंग ने भी कानूनी विशेषज्ञों को उलझा दिया है। इस रिकॉर्डिंग में न तो किसी का नाम स्पष्ट है और न ही आवाज की पुष्टि हो पाई है।

बिना किसी फॉरेंसिक पहचान के इस तरह के ‘अनाम’ सबूतों के आधार पर किसी प्रतिष्ठित परिवार पर आरोप मढ़ना अब कानूनी दांव-पेच में फंसता नजर आ रहा है। एसआईटी अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या यह पूरी पटकथा किसी पुराने रंजिश या संपत्ति हड़पने के बड़े प्लान का हिस्सा तो नहीं है।

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