देहरादून। उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। प्रदेश के हजारों योग्य नर्सिंगकर्मियों का आंदोलन अब विकराल रूप ले चुका है। ‘नर्सिंग एकता मंच’ के बैनर तले चल रहा धरना आज 142वें दिन में प्रवेश कर गया है, जबकि आमरण अनशन सातवें दिन भी जारी है। लंबे संघर्ष के बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस पहल न होने पर नर्सिंगकर्मियों में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है।
धरना स्थल पर बैठे आंदोलनकारी अब थकावट के बावजूद और अधिक दृढ़ हो चुके हैं। उनका साफ कहना है कि अब वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। एक आंदोलनकारी ने कहा, “जब तक शरीर में जान है, अनशन जारी रहेगा।” यह बयान उनकी लंबे समय से अनदेखी की पीड़ा और अब किसी भी सूरत में समझौता न करने के संकल्प को दर्शाता है।
इस बीच, आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) के केंद्रीय उपाध्यक्ष आशुतोष नेगी धरना स्थल पहुंचे और नर्सिंग एकता मंच को अपना पूर्ण समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि नर्सिंगकर्मियों की मांगें पूरी तरह से न्यायसंगत हैं और उन्हें सभी क्षेत्रों में समान अवसर मिलना चाहिए। नेगी ने सरकार से वर्षवार नर्सिंग भर्ती प्रणाली तत्काल लागू करने की मांग की, तभी हजारों नर्सिंग अभ्यर्थियों के साथ सच्चा न्याय हो सकेगा।
नर्सिंगकर्मियों की प्राथमिक मांग ‘वर्षवार भर्ती प्रक्रिया’ लागू करने की है। उनका आरोप है कि पिछले कई वर्षों से भर्ती न होने के कारण हजारों योग्य अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले नर्सिंगकर्मी आज अपने हक के लिए सड़कों पर संघर्ष करने को विवश हैं, जो प्रदेश की मौजूदा व्यवस्था पर एक गंभीर सवाल है।
धरना स्थल पर प्रदेश के कोने-कोने से सैकड़ों नर्सिंग बेरोजगार मौजूद रहे। इनमें नवल पुंडीर, प्रवेश रावत, राजेंद्र कुकरेती, भास्कर, पंकज भंडारी, प्रवीन जोशी, विनोद जोशी, प्रियंका उनियाल, प्रियंका नेगी, अपर्णा सोलंकी, प्रतिभा सहित तमाम नर्सिंगकर्मी शामिल रहे। सभी ने एकजुट होकर आंदोलन को समर्थन देते हुए सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।
आंदोलनकारियों ने सरकार को साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा। उनका कहना है कि ऐसा होने पर उत्पन्न होने वाली स्थिति की पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। फिलहाल, धरना स्थल पर तनाव बना हुआ है और नर्सिंगकर्मी अपनी अंतिम सांस तक संघर्ष जारी रखने का दम भर रहे हैं।

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