एसडीएम के नेतृत्व में जिला समिति ने जांचे पंजीकरण व दस्तावेज; लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई
देहरादून। गर्भाधान एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक (PCPNDT) अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। जिलाधिकारी देहरादून के निर्देश पर शुक्रवार 24 अप्रैल 2026 को शहरी क्षेत्र के अंतर्गत छह अल्ट्रासाउंड केंद्रों का औचक निरीक्षण किया गया।
यह कार्रवाई विकास नगर के उप जिलाधिकारी (एसडीएम) विनोद कुमार के नेतृत्व में गठित जिला निरीक्षण एवं मूल्यांकन समिति के सदस्यों द्वारा की गई। टीम ने बिना किसी पूर्व सूचना के विभिन्न निजी अस्पतालों और इमेजिंग सेंटरों का दौरा किया और वहां लगी अल्ट्रासाउंड मशीनों के साथ-साथ आवश्यक दस्तावेजों की जांच की।
अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (ACMO) एवं समिति की सदस्य डॉ. निधि रावत ने बताया कि निरीक्षण के दौरान मुख्य ध्यान केंद्रों के पंजीकरण के नवीनीकरण, मशीनों के रखरखाव, फार्म-एफ भरने की प्रक्रिया तथा लिंग निर्धारण से संबंधित किसी भी अवैध गतिविधि पर रहा।
उन्होंने बताया कि जिन केंद्रों का निरीक्षण किया गया, उनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- सुभारती चिकित्सालय, झाझरा
- दून इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, शंकरपुर
- देवभूमि हॉस्पिटल, विकास नगर
- मेडिकेयर हॉस्पिटल, सेलाकुई
- क्रिश्चियन हॉस्पिटल, हरबर्टपुर
डॉ. रावत ने बताया, “निरीक्षण के दौरान समिति ने सभी केंद्रों पर उपलब्ध रिकॉर्ड, प्रीनेटल डायग्नोस्टिक रजिस्टर और हर मरीज के लिए भरे जाने वाले फॉर्म-एफ की गहन जांच की। अधिकांश केंद्र अपेक्षाकृत व्यवस्थित मिले, हालांकि कुछ जगह मामूली कमियां देखने को मिली हैं।”
एसडीएम विनोद कुमार ने कहा कि PCPNDT एक्ट का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति है। “इस तरह के निरीक्षण अब नियमित रूप से जारी रहेंगे। जिन केंद्रों में कमियां पाई गई हैं, उन्हें सुधार के लिए नोटिस जारी किया जाएगा। भविष्य में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी,” उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा।
जिला प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि यदि कहीं लिंग निर्धारण या PCPNDT एक्ट के उल्लंघन की सूचना मिले तो तुरंत जिला स्तरीय टोल फ्री नंबर या एसडीएम कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई जाए। सूचना देने वाले का नाम गुप्त रखा जाएगा और उचित पुरस्कार भी दिया जाएगा।
प्रशासन का यह कदम देहरादून जिले में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान की दिशा में एक सार्थक पहल माना जा रहा है।

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