भारतीय सैन्य अकादमी के प्रशिक्षु अधिकारियों ने इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी, देहरादून का किया दौरा

  • इस कार्यक्रम का उद्देश्य वन एवं पर्यावरण प्रबंधन के क्षेत्र में इंटर-इंस्टीट्यूशनल लर्निंग और जागरूकता को बढ़ावा देना रहा
  • आईएमए कैडेट्स के दौरे से वन विभाग और भारतीय सेना के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना रहा
  • अनुभवी आईएफएस अधिकारी द्वारा फॉरेस्ट गवर्नेंस एवं सैन्य-वन समन्वय पर व्याख्यान हुए आयोजित

देहरादून। सोमवार को इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी, देहरादून द्वारा भारतीय सैन्य अकादमी के प्रशिक्षु अधिकारियों के लिए एक्सपोज़र विज़िट का आयोजन किया गया। जिसका उद्देश्य वन एवं पर्यावरण प्रबंधन के क्षेत्र में इंटर-इंस्टीट्यूशनल लर्निंग और जागरूकता को बढ़ावा देने तथा वन विभाग और भारतीय सेना के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना रहा।

इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण लद्दाख के अनुभवी भारतीय वन सेवा अधिकारी एवं श्री जिग्मेट टकपा, आईएफएस (1990 बैच) द्वारा प्रस्तुत मुख्य भाषण एवं पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन रहा, जिसमें उन्होंने फॉरेस्ट गवर्नेंस और सैन्य क्षेत्रों में वन प्रबंधन की जटिलताओं पर विस्तार से चर्चा की।

आईएमए के मेंटर एवं इंस्ट्रक्टर मेजर सुमित सौरव के नेतृत्व में यूनिफॉर्म में सुसज्जित 400 से अधिक ऑफिसर कैडेट्स एवं प्लाटून कमांडरों की टीम आईजीएनएफए के हरि सिंह ऑडिटोरियम में एकत्रित हुई। कार्यक्रम का शुभारंभ आईजीएनएफए के सीनियर कंसल्टेंट श्री एस. आर. रेड्डी के स्वागत संबोधन से हुआ, जिसके पश्चात अकादमी के अपर निदेशक श्री राज कुमार बाजपेयी, आईएफएस द्वारा उद्घाटन भाषण दिया गया।

अपने प्रस्तुतीकरण में श्री जिग्मेट टकपा ने जनपद स्तर पर वन सेवाओं की संरचना एवं कार्यप्रणाली, सैन्य बलों के कैंटोनमेंट एवं ऑपरेशनल क्षेत्रों में वन नियम एवं नीतियाँ तथा वन विभाग एवं सैन्य बलों के बीच समन्वय, सहयोग एवं चुनौतियों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम का समापन मेजर सुमित सौरव, इंस्ट्रक्टर क्लास ए, आईएमए के समापन संबोधन एवं धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

यह कार्यक्रम भविष्य के सैन्य नेतृत्व को विशेष रूप से दूरस्थ एवं पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में वन प्रबंधन की महत्वपूर्ण भूमिका को समझने हेतु एक प्रभावी मंच प्रदान करने में सफल रहा।

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