गणेश गोदियाल ने युवक आत्महत्या मामले में की तीव्र जांच की मांग, पीड़ित परिवार को दी सांत्वना

पौड़ी।उत्तराखंड के पौड़ी जिले में एक गंभीर मामला सामने आया है जो न केवल पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि प्रदेश की पूरी कानून-व्यवस्था पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। सतपुली विकासखंड के रैतपुर गांव में रहने वाले मात्र बीस वर्षीय पंकज कुमार की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने इलाके में एक तूफान खड़ा कर दिया है। इस घटना के बाद से परिवार और स्थानीय समुदाय में गहरा आक्रोश है, और हर तरफ निष्पक्ष जांच की माँग गूँज रही है। प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस संवेदनशील मामले को गंभीरता से लेते हुए रविवार को सीधे पंकज के घर पहुँचे और परिजनों से मिलकर उन्हें ढाढ़स बंधाया। इस दौरान गोदियाल ने स्थानीय पुलिस अधिकारियों से भी विस्तार से बातचीत की और पूरे घटनाक्रम की गहराई से जानकारी ली।

गोदियाल की जांच-पड़ताल के बाद यह बात साफ हुई कि पंकज की मौत के पीछे की कहानी काफी दर्दनाक है। बताया जा रहा है कि एक सड़क दुर्घटना के बाद पंकज को थाने ले जाया गया था, जहाँ उसके साथ कथित रूप से पुलिस कर्मियों द्वारा शारीरिक दुर्व्यवहार किया गया। परिजनों की मानें तो यह प्रताड़ना इतनी गंभीर थी कि मानसिक रूप से टूटे हुए पंकज ने एक अपूरणीय कदम उठा लिया। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और स्थानीय लोगों की गवाहियाँ भी इसी बात की ओर इशारा करती हैं कि कुछ गड़बड़ी जरूर हुई है। गोदियाल ने इस पूरे प्रकरण को बेहद गंभीर और चिंताजनक माना है, क्योंकि यह न सिर्फ एक व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में पुलिस की जिम्मेदारी और कर्तव्य को लेकर एक बड़ा सवाल भी है।

गोदियाल ने तुरंत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को एक विस्तृत पत्र लिखा है जिसमें उन्होंने इस मामले की उच्चस्तरीय और पूरी तरह निष्पक्ष जांच कराने की जोरदार माँग की है। साथ ही उन्होंने सरकार से तीन महत्वपूर्ण माँगें भी रखी हैं। पहली माँग है कि जांच पूरी होने तक आरोपित पुलिसकर्मियों को तुरंत निलंबित किया जाए ताकि कोई भी सबूत-प्रमाण नष्ट न हो। दूसरी माँग में गोदियाल ने कहा है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण माँग यह है कि पीड़ित परिवार को न केवल आर्थिक सहायता दी जाए, बल्कि उनकी सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाए क्योंकि उन्हें अब किसी तरह के खतरे का सामना न करना पड़े।

गोदियाल का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब उत्तराखंड में पुलिस प्रताड़ना का मामला सामने आया है। बीते कुछ सालों में इस तरह की कई दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएँ घटी हैं। उन्होंने नैनीताल के खैरना गांव के बालम बिष्ट और टिहरी जिले के लंबगांव निवासी केशव थलवाल के मामलों का स्पष्ट उल्लेख किया है। यह चिंता का विषय है कि इस तरह की दोहराई जाने वाली घटनाओं ने आम लोगों के मन में पुलिस व्यवस्था के प्रति विश्वास को गहरी चोट पहुँचाई है। लोग अब कानून-व्यवस्था पर भरोसा करने में झिझकते हैं क्योंकि उन्हें डर है कि न्याय की जगह उन्हें प्रताड़ना मिल सकती है।

वर्तमान में प्रशासन की ओर से कुछ कार्रवाई की गई है। सतपुली के थानाध्यक्ष को लाइन हाजिर कर दिया गया है, जो एक सकारात्मक कदम है। हालांकि, इलाके में लोगों का आक्रोश अभी भी जारी है और सभी को पारदर्शी तथा निष्पक्ष जांच की उम्मीद है। गोदियाल की यह सक्रिय भूमिका दिखाती है कि वे पीड़ित परिवार के साथ खड़े हैं और न्याय के लिए संघर्ष में उनका साथ दे रहे हैं। सवाल यह है कि क्या सरकार गोदियाल की माँगों को गंभीरता से लेगी और इस मामले में पूरी पारदर्शिता के साथ कार्रवाई करेगी? आने वाले दिन बताएँगे कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था इस कसौटी पर कितना खरी उतरती है।

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