श्रीनगर (गढ़वाल)। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में संस्थान के नवाचार परिषद (IIC) और विज्ञान भारती (विभा) उत्तराखंड के सहयोग से राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस उल्लासपूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम में शिक्षाविद्, शोधार्थी, विद्यार्थी और नवाचारकर्ता एकत्रित हुए और विज्ञान व प्रौद्योगिकी के माध्यम से राष्ट्रनिर्माण में योगदान पर विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्ज्वलन से हुआ और स्वागत संबोधन प्रो. टी. सी. उपाध्याय ने दिया। कार्यक्रम की रूपरेखा एवं उद्देश्य पर प्रो. हेमवती नंदन ने प्रकाश डाला और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के महत्व तथा भारत की तकनीकी उपलब्धियों को भावी नवाचारों के प्रेरणा स्त्रोत के रूप में प्रस्तुत किया। संस्थान नवाचार परिषद की दृष्टि व गतिविधियों को प्रो. नटनम गोविंदम ने बताया और विद्यार्थियों में नवाचार तथा उद्यमिता को बढ़ावा देने के प्रयास साझा किए।
डॉ. वरुण बड़थ्वाल ने समकालीन चुनौतियों के समाधान में तकनीकी उन्नति की भूमिका पर बल दिया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्री प्रकाश सिंह ने उच्च शिक्षण संस्थानों की वैज्ञानिक सोच व नवाचार आधारित विकास में विद्यार्थियों की भूमिका पर जोर देते हुए उन्हें प्रेरित किया। मुख्य वक्तव्य सत्र में प्रो. राजेंद्र डोभाल (कुलपति, श्री रामा हिमालयन विश्वविद्यालय) ने प्रतिभा की पहचान और समर्पण से उसे विकसित करने के महत्त्व पर प्रकाश डाला। प्रो. वी. के. बाँगा (निदेशक, जी बी पंत इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, पौड़ी) ने आधुनिक जीवन में नई तकनीकों के प्रभाव पर अपने विचार रखे।

डॉ. शुभ्रा काला ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के महत्व, राष्ट्रीय विकास में तकनीक की भूमिका और भारत में परमाणु ऊर्जा की यात्रा पर विस्तृत प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण विद्यार्थी-प्रेरित पोस्टर प्रस्तुति प्रतियोगिता रही, जिसमें विभिन्न विभागों के छात्रों ने विज्ञान व प्रौद्योगिकी संबंधित नवाचारी विचार और शोध-आधारित पोस्टर प्रस्तुत किए। विजेताओं को पुरस्कार और प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।
कार्यक्रम में एक खुला परिचर्चा सत्र भी आयोजित किया गया, जिसका संचालन डॉ. वरुण बड़थ्वाल ने किया; इसमें प्रतिभागियों ने उभरती तकनीकों, नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र और भावी संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए। समापन पर प्रो. हेमवती नंदन ने विद्यार्थियों को समर्पण तथा सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ अनुसंधान व नवाचार के क्षेत्र में सक्रिय होने के लिए प्रेरित किया। अंतिम चरण में डॉ. भास्करन ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत कर आयोजकों, अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

यह आयोजन विज्ञान जागरूकता, तकनीकी नवाचार और सहयोगात्मक शिक्षण को बढ़ावा देने वाला प्रेरणास्पद मंच साबित हुआ और विश्वविद्यालय में शोध-आधारित नवाचार संस्कृति को प्रोत्साहन देने का संकल्प मजबूत किया।

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