तेल कीमतों में वृद्धि वैश्विक संकट में आवश्यक, जो दुनिया में सबसे कम है : भाजपा

सरकार ने जनता को संकट से बचाए रखा, विपक्ष दो महीने से वृद्धि कराना चाहता था: भट्ट

जनता, देशहित में सरकार के साथ, विपक्ष अपने नकारत्मक रुख पर करे विचार: भट्ट

देहरादून।  भाजपा ने तेल दामों में वृद्धि को वैश्विक संकट को देखते हुए आवश्यक कदम बताया है। प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद श्री महेंद्र भट्ट ने कहा, सरकार की कूटनीति और प्रबंधन के कारण ही अब तक आम लोगों को खाड़ी युद्ध के प्रभाव से बचाए रखा गया और अब जो वृद्धि हुई है वह भी दुनिया के बड़े बड़े देशों के मुकाबले बहुत कम है। लेकिन विपक्ष चाहता है कि जनता पर यह बढ़ोत्तरी दो महीने ही क्यों नहीं लागू कर दी गई। जनता देशहित में सरकार के इस निर्णय के पूरी तरह साथ है, लिहाजा विपक्ष को भी अपने नकारत्मक रुख पर विचार की जरूरत।

विभिन्न माध्यमों पर मीडिया से हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि ढाई महीने से अधिक समय से जारी खड़ी युद्ध से दुनिया ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है। जिसके चलते अमेरिका यूरोप जैसे विकसित देशों में पहले ही 25 फीसदी से अधिक पेट्रोलियम पदार्थों के दामों में बढ़ोत्तरी की गई है। वहीं अधिकांश देशों में दाम बढ़ने के साथ पहले ही, पेट्रोल डीजल की जबरदस्त कमी भी देखी जा रही है। लेकिन भारत में पीएम श्री नरेंद्र मोदी की कूटनीति के चलते भारत एकमात्र देश है जो इससे अछूता रहा है। कच्चे तेल के बढ़ते दामों का बोझ मोदी सरकार ने आम जनता पर नहीं पड़ने दिया। दुनिया के साथ हमारी विपक्षी पार्टियां भी चिंतित थी कि दाम क्यों नहीं बढ़ाए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा, चूंकि युद्ध को लेकर हालात में सुधार नहीं हो रहा है और इससे तेल कंपनियों की आर्थिक सेहत भी लागतार खराब हो रही है। लिहाजा वैश्विक तेल संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण यह वृद्धि एक सीमित, सुनियोजित और आवश्यक कदम है। क्योंकि भारत ने दो महीने से अधिक समय तक नागरिकों को इस झटके से बचाने के बाद ही दाम बढ़ाए हैं।जबकि दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत में मूल्य वृद्धि सबसे कम रही है, जहां पेट्रोल में 3.2% और डीजल में 3.4% की वृद्धि हुई है। वो भी तब जब यह वृद्धि तेल विपणन कंपनियों को वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण हो रहे भारी नुकसान को कम करने के लिए की गई है।

वहीं विपक्ष के आरोपों पर पलटवार कर कहा कि यह बढ़ोतरी अन्य देशों की तुलना में काफी मामूली है। जब तक संभव हुआ सरकार ने श्रेष्ठ कूटनीति और कुशल प्रबंधन से आम लोगों को इस संकट के साइड इफेक्ट से बचाने का काम किया गया। पीएम द्वारा देशवासियों से ऊर्जा संरक्षण की अपील भी की, जिसकी शुरुआत उन्होंने स्वयं से की। अब देश की आर्थिक स्थिति और वैश्विक तेल बाजार की जरूरतों को देखते हुए एक कदम बहुत आवश्यक हो गया था। जिसको जनता स्वीकार करते हुए, सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ना चाहती है। ऐसे में कांग्रेस और विपक्ष को भी राष्ट्रहित में नकारात्मक एवं भ्रम की राजनीति का त्याग करना चाहिए।

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