देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर गुटबाजी के गंभीर संकेत सामने आए हैं। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं एआईसीसी सदस्य सूर्यकांत धस्माना ने चमोली जनपद में हुई एक घटना का हवाला देते हुए दावा किया है कि भाजपा के अपने ही सांसद और विधायकों के बीच सत्ता संघर्ष चरम पर है।
शुक्रवार को चमोली जिले के गोपेश्वर स्थित कलेक्ट्रेट सभागार में गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी की अध्यक्षता में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक का उद्देश्य जिले में चल रहे विभिन्न विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा करना था। हालांकि, जिले के दोनों भाजपा विधायक – जिनके नामों का तत्काल उल्लेख नहीं किया गया – बैठक से दूर रहे।
श्री धस्माना ने अपने कैंप कार्यालय में पत्रकारों को बताया, “यह कोई सामान्य घटना नहीं है। जिस समय सांसद बलूनी जी बैठक ले रहे थे, उसी दौरान जिले के दोनों विधायक और नगरपालिका अध्यक्ष लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के निरीक्षण भवन में बैठे थे। जब सांसद को इसकी भनक लगी, तो उन्होंने एक अधिकारी को विधायकों को बुलाने भेजा, लेकिन विधायकों ने बैठक में आने से साफ इनकार कर दिया।”
धस्माना ने आगे बताया कि बैठक समाप्त होने के बाद सांसद अनिल बलूनी स्वयं निरीक्षण भवन पहुंचे, जहां विधायक मौजूद थे, लेकिन तब तक राजनीतिक तनाव साफ दिख चुका था। उन्होंने कहा, “यह घटना भाजपा में चल रही गुटबाजी का खुलेआम शक्ति प्रदर्शन है। अपने ही पार्टी के सांसद की बैठक का बहिष्कार करना आंतरिक संघर्ष की चरम सीमा को दर्शाता है।”
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष ने चेतावनी देते हुए कहा कि सत्ताधारी दल की इस आंतरिक धड़ेबाजी से प्रदेश का विकास गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा, “जनता को इस गुटबाजी की सजा भुगतनी पड़ रही है। विकास कार्य ठप हो रहे हैं और आम आदमी की समस्याएं अनसुलझी रह जा रही हैं।”
गौरतलब है कि उत्तराखंड भाजपा में पिछले कुछ समय से आंतरिक कलह की खबरें आम हो गई हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व को लेकर भी अक्सर मतभेद की चर्चा होती रहती है। फिलहाल, इस मामले में भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन धस्माना के इस बयान ने प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है।

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