
देहरादून। चर्चित भूमि धोखाधड़ी मामलों में गिरफ्तार 20 हजार के इनामी अभियुक्त प्रदीप सकलानी से पूछताछ के बाद अब पूरे मामले ने राजनीतिक रंग पकड़ लिया है। रायपुर थाना पुलिस द्वारा गिरफ्तार प्रदीप सकलानी वर्तमान में न्यायिक अभिरक्षा में जेल में बंद है। उस पर जनपद के विभिन्न थानों में जमीन संबंधी धोखाधड़ी के 26 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं, जबकि दो दर्जन से अधिक चेक बाउंस के मामले विभिन्न न्यायालयों में विचाराधीन हैं।
पुलिस के अनुसार नेहरू कॉलोनी के तीन तथा रायपुर थाना क्षेत्र के एक मुकदमे में वांछित प्रदीप सकलानी ने पूछताछ के दौरान कई ऐसे लोगों के नाम उजागर किए हैं, जिन्होंने कथित तौर पर धोखाधड़ी में उसका सहयोग किया और पुलिस कार्रवाई से बचाने के प्रयास किए। इसी क्रम में वरिष्ठ पत्रकार हेम भट्ट को भी संदिग्धता के आधार पर पूछताछ के लिए थाने बुलाया गया, जिसके बाद यह मामला राजनीतिक और पत्रकारिता जगत में चर्चा का विषय बन गया है।
इस कार्रवाई का विरोध करते हुए विधायक अरविन्द पाण्डेय ने पुलिस पर प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला करने का आरोप लगाया। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इस प्रकार की कार्रवाई के “अच्छे परिणाम सामने नहीं आएंगे।”
वहीं कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने भी पुलिस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि नेहरू कॉलोनी थाना पुलिस सुबह करीब 4 बजे वरिष्ठ पत्रकार हेम भट्ट के घर पहुंची और परिवार के सामने उनके साथ अभद्रता तथा मारपीट करते हुए उन्हें उठाकर ले गई।
गरिमा दसोनी ने कहा कि यदि किसी मामले में पूछताछ करनी थी तो पुलिस कानूनी और शालीन प्रक्रिया अपना सकती थी। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, “क्या अब अभिव्यक्ति की आजादी खत्म हो गई है? क्या लोकतंत्र की जगह तानाशाही लागू हो गई है?”
उन्होंने आरोप लगाया कि सुबह तड़के की गई कार्रवाई का उद्देश्य परिवार को आतंकित करना था। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि यह पूरी घटना लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला प्रतीत होती है।
दसोनी ने यह भी दावा किया कि लगभग दो महीने पहले हेम भट्ट पर देर रात हमला हुआ था, जिसमें उनके सिर पर चोट पहुंचाई गई थी। उन्होंने कहा कि उस घटना को बजरंग दल से जुड़े एक विवादित इंटरव्यू से जोड़कर देखा जा रहा था। उनके मुताबिक विधायक अरविंद पांडे भी यह आशंका जता चुके हैं कि उसी इंटरव्यू के कारण हेम भट्ट को निशाना बनाया जा रहा है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि एक ओर पत्रकारों को “टटपूंजिया” कहा जाता है और दूसरी ओर पत्रकारों के खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि लोकतंत्र में पत्रकारों की आवाज दबाने का प्रयास लंबे समय तक नहीं चल सकता।
हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरी कार्रवाई तथ्यों और विवेचना के आधार पर की जा रही है तथा भूमि धोखाधड़ी नेटवर्क से जुड़े हर व्यक्ति की निष्पक्ष जांच की जाएगी।

Recent Comments