उत्तराखंड ऊर्जा विभाग में बड़ा खेल: दागी अधिकारी को MD बनाने के लिए बदले नियम, चयन प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद भी पिटकुल में नियमों को ताक पर रख चहेते अधिकारी को उपकृत करने की तैयारी, RTI कार्यकर्ता का बड़ा खुलासा

पिटकुल भर्ती विवाद: तकनीकी योग्यता खत्म कर गैर-तकनीकी को रास्ता बनाने का आरोप, ऊर्जा विभाग की पारदर्शिता कटघरे में

देहरादून :- उत्तराखंड के ऊर्जा विभाग और विशेषकर पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) में प्रशासनिक पारदर्शिता, नियमों में फेरबदल और पसंदीदा अधिकारियों को लाभ पहुँचाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरटीआई व सामाजिक कार्यकर्ता अनिल चंद्र बलूनी ने विभाग में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार और एक विशिष्ट अधिकारी, प्रकाश चंद्र ध्यानी, को शीर्ष पद पर बैठाने के लिए सेवा नियमावली में किए गए मनमाने संशोधनों को लेकर शासन की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े किए हैं।बलूनी के अनुसार, विभाग में भ्रष्टाचार उच्च स्तर के संरक्षण में फल-फूल रहा है, जिसके खिलाफ वे लगातार विभिन्न वैधानिक और न्यायिक मंचों पर कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।

इस विवाद की जड़ें उत्तराखंड उच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका से जुड़ी हैं, जिसमें प्रकाश चंद्र ध्यानी की तकनीकी अयोग्यता, कथित फर्जी दस्तावेजों, सेवा अभिलेखों में अनियमितताओं और नियमों के विरुद्ध पदोन्नति को चुनौती दी गई थी। माननीय उच्च न्यायालय ने बीती 18 फरवरी 2026 को अपने फैसले में स्पष्ट माना था कि संबंधित अधिकारी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हैं और उन्हें एमडी जैसे शीर्ष तकनीकी पद पर बने रहने के योग्य नहीं माना जा सकता, जिसके बाद उन्हें पद से हटाने के आदेश दिए गए। हालांकि, पदोन्नति में कूटरचना और नियम विरुद्ध सेवा विस्तार जैसे गंभीर बिंदु अनिर्णीत रहने के कारण मामला सर्वोच्च न्यायालय पहुंचा।माननीय सुप्रीम कोर्ट ने 16 अप्रैल 2026 को पारित अपने आदेश में याचिकाकर्ताओं को इन गंभीर अनुशासनात्मक बिंदुओं को पुनः हाईकोर्ट की खंडपीठ के समक्ष उठाने की स्वतंत्रता दी है, जिससे स्पष्ट है कि यह मामला केवल तकनीकी अयोग्यता तक सीमित नहीं है।

हैरानी की बात यह है कि न्यायालय के कड़े रुख और एलएलबी की पढ़ाई के दौरान विभाग से वेतन आहरण करने जैसे गंभीर मामलों की जांच लंबित होने के बावजूद, उक्त अधिकारी को पुनः एमडी बनाने के लिए सेवा नियमावली में सुनियोजित तरीके से बड़े बदलाव कर दिए गए। पूर्व की नियमावली में जहाँ शीर्ष तकनीकी पदों के लिए बी-टेक की डिग्री अनिवार्य थी, वहीं संशोधित नियमों में इस अनिवार्यता को पूरी तरह समाप्त कर गैर-तकनीकी व्यक्ति के लिए भी रास्ते खोल दिए गए। साथ ही आवेदन के लिए अधिकतम आयु सीमा को भी 58 से बढ़ाकर 60 वर्ष कर दिया गया। यह पूरा घटनाक्रम साफ तौर पर इशारा करता है कि ये संशोधन किसी संस्थागत आवश्यकता के लिए नहीं, बल्कि एक विशेष व्यक्ति को लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से किए गए। इसके अलावा, पिछले लगभग तीन वर्षों से पिटकुल में नियमित नियुक्तियां न कर योग्य तकनीकी अधिकारियों की उपेक्षा की गई और प्रभार आधारित व्यवस्था को बढ़ावा दिया गया।

हाल ही में ऊर्जा विभाग में एमडी पद की चयन प्रक्रिया से जुड़ा एक अत्यंत गोपनीय स्क्रूटनी दस्तावेज सार्वजनिक रूप से वायरल होने से इस पूरी व्यवस्था की निष्पक्षता तार-तार हो गई है।वायरल रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान एमडी (यूपीसीएल) श्री बुधियाल को इस पद के लिए अयोग्य माना गया है, जबकि पिटकुल के मुख्य अभियंता राजीव गुप्ता और यूपीसीएल के पूर्व निदेशक (वित्त) नवीन गुप्ता को एसीआर (ACR) अपूर्ण होने का हवाला देकर रेस से बाहर कर दिया गया है। इसके विपरीत, गंभीर आरोपों और अदालती जांच का सामना कर रहे प्रकाश चंद्र ध्यानी को बिना किसी शर्त के पात्र घोषित कर दिया गया है। एन-केन-प्रकारेण सेवा नियमावली बदलकर एक विवादित अधिकारी को एमडी बनाने के इस प्रयास पर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी सवाल उठा चुके हैं। यह पूरा प्रकरण उत्तराखंड की शासन व्यवस्था, प्रशासनिक निष्पक्षता और तकनीकी संस्थानों की स्वायत्तता पर गहरा दाग लगाता है, जिसके चलते अब इस पूरे चयन तंत्र की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग जोर पकड़ रही है।

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