वीसीएसजीयूयूवी में नए कुलपति की नियुक्ति, डॉ. भगवती प्रसाद भट्ट संभालेंगे तीन वर्ष तक कमान

देहरादून/पौड़ी। उत्तराखंड के राजभवन ने वीर चंद्र सिंह गढ़वाली उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय (वीसीएसजीयूयूवी), भरसार, पौड़ी गढ़वाल के नए कुलपति के रूप में वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. भगवती प्रसाद भट्ट की नियुक्ति का आदेश जारी कर दिया है। राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह द्वारा जारी आदेश के अनुसार डॉ. भट्ट कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से तीन वर्ष अथवा अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, विश्वविद्यालय के कुलपति पद का दायित्व निभाएंगे।

राजभवन द्वारा जारी आदेश में बताया गया है कि यह नियुक्ति उत्तर प्रदेश कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय अधिनियम, 1958 (उत्तराखंड राज्य में यथानुकूलित) के प्रावधानों के तहत गठित चयन समिति द्वारा प्रस्तुत पैनल के आधार पर की गई है। डॉ. भट्ट वर्तमान में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) से संबद्ध संस्थान में वरिष्ठ दायित्व निभा रहे हैं और कृषि अनुसंधान तथा प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में उनका लंबा अनुभव रहा है।

5 फरवरी 1965 को जन्मे डॉ. भगवती प्रसाद भट्ट ने एमएससी और पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। उनकी विशेषज्ञता का क्षेत्र कृषि प्रणाली अनुसंधान एवं कृषि वानिकी है। वर्तमान में वे भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान (ICAR-IISWC), देहरादून के निदेशक के रूप में कार्यरत हैं।

डॉ. भट्ट को प्रोफेसर के रूप में 19 वर्ष से अधिक का अनुभव प्राप्त है, जबकि अनुसंधान, शिक्षण एवं प्रसार कार्यों में उनका कुल अनुभव 34 वर्षों से अधिक का है। उन्होंने पूर्वोत्तर क्षेत्र, पटना, नई दिल्ली तथा देहरादून सहित देश के विभिन्न प्रमुख कृषि अनुसंधान संस्थानों में महत्वपूर्ण प्रशासनिक एवं वैज्ञानिक पदों पर कार्य किया है।

डॉ. भट्ट की शैक्षणिक एवं शोध उपलब्धियां अत्यंत प्रभावशाली रही हैं। उनके नाम राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में 277 शोध-पत्र, 71 पुस्तक अध्याय, 19 पुस्तकें, 31 तकनीकी बुलेटिन तथा अनेक प्रशिक्षण एवं नीति दस्तावेज प्रकाशित हैं।

उन्हें विभिन्न राष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा 18 राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए जा चुके हैं। इसके अलावा वे राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी, राष्ट्रीय पारिस्थितिकी संस्थान, राष्ट्रीय आधारभूत विज्ञान अकादमी तथा भारतीय कृषि वानिकी सोसायटी के फेलो भी हैं।

डॉ. भट्ट ने तीन अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों का आयोजन किया है तथा 40 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों में सहभागिता की है। उन्होंने 42 अनुसंधान परियोजनाओं का सफल संचालन किया, जिनमें 84 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय भागीदारी रही। इसके अतिरिक्त उन्होंने 24 एमएससी तथा 9 पीएचडी विद्यार्थियों का मार्गदर्शन भी किया है।

गूगल स्कॉलर के अनुसार उनके शोध कार्यों को 9,300 से अधिक उद्धरण प्राप्त हुए हैं, जबकि उनका एच-इंडेक्स 49 और आई-10 इंडेक्स 206 है, जो किसी भी शोधकर्ता की अकादमिक प्रतिष्ठा का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है।

राज्य के प्रमुख औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के कुलपति पद पर डॉ. भट्ट की नियुक्ति को कृषि, बागवानी और वानिकी शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि उनके व्यापक शोध अनुभव, प्रशासनिक क्षमता और राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित पहचान से विश्वविद्यालय को नई दिशा मिलेगी तथा शिक्षा, अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में संस्थान को और मजबूती प्राप्त होगी।

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