
कार्यालय के बाहर रोके पैर, DM ने खुद बुलाकर सुनी हर बात;अफसर ने धैर्य से सुना – महिला भावुक, DM के मस्तक पर रखा आशीष
उत्तरकाशी। पहाड़ी इलाकों में भू-धंसाव एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है, मगर जब प्रशासन का मुखिया खुद मैदान में उतरे और आमजन की पीड़ा को अपनी आँखों-कानों से परखे , तो वह दृश्य किसी अधिकारी-जनता के सामान्य मुलाकात से कहीं बढ़कर हो जाता है। ऐसा ही एक मार्मिक और मानवीय पल देखने को मिला जब जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने विकासखंड चिन्यालीसौड़ के ग्राम सभा छणद-खालसी के दर्जनों ग्रामीणों से मुलाकात की, जो अपनी गाँव की तेजी से फटती जमीन और दरकती ढलानों को लेकर कलेक्ट्रेट पहुँचे थे।
दरअसल, छणद-खालसी के ग्रामीण पिछले कई दिनों से अपने मकानों और खेतों के पास बढ़ती दरारों व भू-स्खलन से बेहाल थे। जब उन्होंने डीएम कार्यालय का दरवाजा खटखटाया, तो अधिकारियों की सामान्य दिनचर्या में उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ सकता था, मगर जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने स्वयं उन्हें देखा और अपने कार्यालय से बाहर निकलकर सभी ग्रामीणों को अपने पास बुला लिया।
इस दौरान उन्होंने न तो कोई अधीरता दिखाई और न ही औपचारिकता की दूरी बनाए रखी। बल्कि,उनकी बातें सुनीं और हर एक पीड़ित व्यक्ति से एक-एक करके उसकी समस्या जानी। इस दौरान एक बुजुर्ग महिला ने गढ़वाली भाषा में अपनी पीड़ा साझा की, जिसे जिलाधिकारी ने पूरे धैर्य और आत्मीयता के साथ सुना।
इस सौम्य व्यवहार और संवेदनशीलता से जब वह बुजुर्ग महिला इतनी पिघली कि उसने सहज भाव से जिलाधिकारी के सिर पर अपना हाथ रख दिया और गढ़वाली परंपरा के अनुसार दीर्घायु एवं उत्तम कार्यों के लिए आशीर्वचन दिए। यह देखकर वहाँ उपस्थित सभी ग्रामीण भाव-विभोर हो उठे और कई ने इस दृश्य को एक ‘अधिकारी-जनता के मधुर संबंध’ का सजीव उदाहरण बताया।
प्रशांत आर्य के इस व्यवहार ने ग्रामीणों के मन में यह बात पक्की कर दी कि वे किसी सख्त अफसर से नहीं बल्कि अपने ही परिवार के किसी बड़े सदस्य से मिल रहे हैं। महिलाओं ने कहा – “हमने कभी नहीं सोचा था कि इतने बड़े अधिकारी इतने सरल होंगे, उन्होंने हमारी हर बात को सुना और तुरंत काम करने का वादा किया।”

ग्रामीणों ने डीएम की कार्यशैली की जमकर तारीफ की और कहा कि अगर हर अधिकारी उन्हीं के मार्ग पर चले तो पहाड़ की तमाम विपदाएं आसानी से हल हो सकती हैं।
इस पूरे प्रसंग के दौरान डीएम ने कहा कि प्रशासन की पहली प्राथमिकता लोगों की जान-माल की सुरक्षा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भूस्खलन की गंभीरता को समझते हुए जल्द ही न सिर्फ आपात राहत, बल्कि स्थायी निवारण योजना भी तैयार की जाएगी।
इस घटनाक्रम ने स्पष्ट कर दिया कि एक अधिकारी की सरलता, धैर्य और सहानुभूति कितनी बड़ी शक्ति होती है। बुजुर्ग महिला के आशीर्वाद ने उस पूरे दिन को एक आध्यात्मिक अनुभव में बदल दिया, जबकि ग्रामीणों के चेहरे पर आश्वस्ति लौट आई। यही वह क्षण था जब प्रशांत आर्य एक सामान्य अधिकारी से ‘लोकप्रिय अधिकारी ’ बनकर उभरे, जिनका स्वभाव उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया।

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