
जिस विचारधारा ने आज़ादी की लड़ाई नहीं लड़ी, वही वीरों का अपमान कर रही
देहरादून। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं एआईसीसी सदस्य सूर्यकांत धस्माना ने लैंसडाउन से भाजपा विधायक दिलीप रावत द्वारा महान स्वतंत्रता सेनानी वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर की गई कथित टिप्पणी को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और अपमानजनक बताते हुए भाजपा नेतृत्व से सार्वजनिक माफी मांगने तथा विधायक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
अपने कैंप कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए धस्माना ने कहा कि वीर चंद्र सिंह गढ़वाली केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के गौरव हैं। पेशावर कांड में उनके अद्वितीय साहस और देशभक्ति के कारण उन्हें पूरे देश में सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानी के बारे में अनर्गल टिप्पणी वही व्यक्ति कर सकता है, जिसकी सोच उस विचारधारा से प्रभावित हो, जिसने स्वतंत्रता संग्राम में कोई योगदान नहीं दिया, बल्कि अंग्रेजों के पक्ष में खड़े होकर उनके लिए मुखबिरी का काम किया।
धस्माना ने कहा कि वीर चंद्र सिंह गढ़वाली उन चुनिंदा स्वतंत्रता सेनानियों में शामिल थे, जिन्होंने देश की आजादी के लिए महात्मा गांधी और पंडित जवाहरलाल नेहरू के समान लंबा जेल जीवन व्यतीत किया। उन्होंने कहा कि गढ़वाली जी का जन्म 25 दिसंबर 1891 को तत्कालीन गढ़वाल की राजधानी चांदपुरगढ़ में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। आर्थिक अभाव के कारण वे नियमित स्कूली शिक्षा प्राप्त नहीं कर सके, लेकिन उन्होंने स्वाध्याय के माध्यम से स्वयं को शिक्षित किया।
धस्माना ने कहा कि 23 अप्रैल 1930 को पेशावर के ऐतिहासिक घटनाक्रम ने वीर चंद्र सिंह गढ़वाली को अमर कर दिया। उस समय सीमांत गांधी खान अब्दुल गफ्फार खान की गिरफ्तारी के विरोध में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए थे। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए तैनात रॉयल गढ़वाल राइफल्स को अंग्रेज अधिकारी ने गोली चलाने का आदेश दिया, लेकिन हवलदार मेजर चंद्र सिंह गढ़वाली ने अपने साथियों को स्पष्ट आदेश दिया- “सीज़ फायर”। उनके नेतृत्व में सैनिकों ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने से इनकार कर दिया। इस साहसिक निर्णय ने अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिला दी।
उन्होंने बताया कि इस घटना के बाद चंद्र सिंह गढ़वाली और उनके साथियों का कोर्ट मार्शल किया गया तथा उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। उन्होंने एबटाबाद, बरेली और लखनऊ सहित विभिन्न जेलों में 11 वर्ष 6 माह तक कारावास भुगता। रिहाई के बाद भी वे महात्मा गांधी के भारत छोड़ो आंदोलन में शामिल हुए और दोबारा जेल गए। जेल के दौरान उनकी मुलाकात महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे महान नेताओं से हुई। धस्माना ने दावा किया कि नेताजी और नेहरू उन्हें सम्मानपूर्वक “बड़े भाई” कहकर संबोधित करते थे।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद वीर चंद्र सिंह गढ़वाली ने अपना शेष जीवन गढ़वाल में बिताया और 1 अक्टूबर 1979 को लंबी बीमारी के बाद कोटद्वार में उनका निधन हो गया।
सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि भाजपा विधायक की टिप्पणी ने पूरे उत्तराखंड और देशवासियों की भावनाओं को आहत किया है। उन्होंने मांग की कि भारतीय जनता पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इस मामले में प्रदेश और देश की जनता से सार्वजनिक माफी मांगे तथा संबंधित विधायक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करे।

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