“महिलाओं के हक़ की जंग: AAP ने उत्तराखंड सरकार को घेरा, ₹1000 सम्मान राशि, CBI जांच और फास्ट ट्रैक कोर्ट की उठाई माँग”

देहरादून।  उत्तराखंड में महिला सुरक्षा, सम्मान और न्याय को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने धामी सरकार के खिलाफ एक साथ कई मोर्चों पर हमला बोल दिया है। पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष उमा गौड़ सिसोदिया ने शुक्रवार को देहरादून स्थित पार्टी मुख्यालय में प्रेस वार्ता कर सरकार पर महिलाओं से किए गए चुनावी वादे तोड़ने, बढ़ते अपराधों को रोकने में नाकाम रहने और चर्चित मामलों में पीड़ितों को न्याय दिलाने में विफल रहने का गंभीर आरोप लगाया।

प्रेस वार्ता में उमा गौड़ सिसोदिया ने सबसे पहले महिला सम्मान राशि का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा, “भाजपा ने विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड की हर बहन-बेटी को हर महीने आर्थिक सहायता देने का वादा किया था, लेकिन सरकार बनने के बाद यह वादा धूल में मिल गया। आज महंगाई ने आसमान छू रखा है, घर-गृहस्थी चलाना मुश्किल हो गया है। सरकार को तुरंत ₹1,000 प्रतिमाह महिला सम्मान राशि लागू करनी चाहिए, वरना यह महिलाओं के साथ धोखा है।

सिसोदिया ने सबसे तीखा हमला अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर किया। उन्होंने कहा कि इस घटना को तीन साल से अधिक का वक्त बीत चुका है, लेकिन आज भी पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिल पाया है। कई बड़े सवाल अनुत्तरित हैं। उन्होंने सरकार पर निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए तीन प्रमुख मांगें रखीं—

1. इस मामले में तत्काल CBI जांच कराई जाए।

2. मामले में कथित VIP का नाम सार्वजनिक किया जाए, ताकि आम जनता को सच्चाई पता चले।

3. सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में पूरी कराई जाए, ताकि दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिल सके।

आम आदमी पार्टी ने NEET परीक्षा पेपर लीक मामले को भी गरमाते हुए कहा कि इस घटना से प्रभावित उत्तराखंड की एक मासूम छात्रा की मौत के बाद भी सरकार ने कोई संवेदनशीलता नहीं दिखाई। उमा गौड़ सिसोदिया ने कहा, “पेपर लीक से जिस छात्रा का भविष्य तबाह हुआ, उसकी मौत हो गई, लेकिन मुख्यमंत्री को अब तक इस पर बोलने की फुर्सत नहीं मिली।” उन्होंने मांग की कि—

· इस मामले के सभी दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए।
· पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवज़ा दिया जाए।
· परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।

महिला सुरक्षा व्यवस्था पर निशाना साधते हुए AAP ने दावा किया कि प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराध लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन न तो पुलिस की प्रतिक्रिया समय पर होती है और न ही पीड़ितों को इंसाफ मिलता है। सिसोदिया ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था नहीं सुधारी, तो आंदोलन तेज किया जाएगा। उन्होंने माँग रखी कि—

· प्रत्येक जिले में महिला सुरक्षा कमांड सेंटर स्थापित किए जाएं।
· 112 हेल्पलाइन का रिस्पॉन्स टाइम 10 मिनट के भीतर सुनिश्चित किया जाए, ताकि संकट की घड़ी में मदद तुरंत पहुँचे।

प्रेस वार्ता के अंत में उमा गौड़ सिसोदिया ने साफ किया कि अब महिलाएं सिर्फ वोट बैंक नहीं, बल्कि हक़ माँगने वाली हैं। उन्होंने राज्य सरकार के सामने यह चार सूत्री माँगपत्र रखा—

1. उत्तराखंड की हर महिला को ₹1,000 प्रतिमाह सम्मान राशि दी जाए।

2. अंकिता भंडारी हत्याकांड की CBI जांच कराई जाए और फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई पूरी की जाए।

3. NEET पेपर लीक के दोषियों पर कार्रवाई कर पीड़ित परिवार को 50 लाख मुआवज़ा + सरकारी नौकरी दी जाए।

4. पूरे प्रदेश में महिला सुरक्षा कमांड सेंटर खोले जाएं और 112 हेल्पलाइन को और बेहतर बनाया जाए।

गौरतलब है कि इन सभी गंभीर आरोपों और माँगों पर राज्य सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। AAP ने साफ संकेत दिया है कि अगर सरकार ने इन माँगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा उत्तराखंड की सियासत को काफी गर्म कर सकता है, खासकर महिला वोटरों के बीच।

फिलहाल, सभी निगाहें धामी सरकार की ओर हैं कि वह AAP के इन आरोपों का जवाब देती है या फिर मौन रहकर विपक्ष को मुद्दा देती रहती है।

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