अब वीबी-जीरामजी योजना से सुधरेंगे खस्ताहाल स्कूल: डॉ. धन सिंह रावत

D-श्रेणी स्कूलों का 3 दिन में भेजें नया प्रस्ताव, अनियमितता पर जांच के आदेश

देहरादून। प्रदेश के क्षतिग्रस्त स्कूलों को संवारने के लिए अब वीबी-जीरामजी यानी विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन योजना से भी धनराशि खर्च की जा सकेगी। विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने गुरुवार को शिक्षा निदेशालय में समीक्षा बैठक कर यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत चाहरदीवारी, संपर्क मार्ग, शौचालय, खेल मैदान, पेयजल और विद्युतीकरण सहित भवनों की मरम्मत के लिए धन उपलब्ध होगा। इसके लिए ग्राम पंचायत स्तर पर प्रस्ताव पारित करना जरूरी होगा।

डॉ. रावत ने बैठक में सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए कि डी-श्रेणी विद्यालयों के भवन निर्माण हेतु पूर्व में भेजे गए प्रस्तावों का तीन दिन के भीतर पुनः निरीक्षण कर शिक्षा निदेशालय को उपलब्ध कराएं। साथ ही प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र से मानक पूरे करने वाले और विषम परिस्थितियों वाले विद्यालयों के उच्चीकरण संबंधी प्रस्ताव भी तीन कार्य दिवस में भेजने को कहा।

मंत्री ने आपदा से क्षतिग्रस्त विद्यालय भवनों, संपर्क मार्गों और अन्य जरूरी सुविधाओं के लिए आपदा न्यूनीकरण मद का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस मद के लिए जिलाधिकारियों को धनराशि उपलब्ध कराई जा चुकी है। आपदा से प्रभावित स्कूलों के प्रस्ताव अब जिला अधिकारी को उपलब्ध कराने होंगे।

बैठक में डॉ. रावत ने मंडल, जनपद और ब्लॉक स्तर पर किए गए शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मियों के सभी सम्बद्धीकरण तत्काल प्रभाव से निरस्त करने के निर्देश दिए। आदेश का पालन न करने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी।

उन्होंने ‘जादू का पिटारा’, कंप्यूटर और फर्नीचर जैसी मदों में जिलों को मिली धनराशि के खर्च में बड़ी अनियमितता पकड़े जाने की बात कही। मंत्री ने कहा कि निविदा आमंत्रित करने के बावजूद स्वीकृत धनराशि के बराबर की ही निविदाएं पास की गईं, जो विभागीय कर्मियों और फर्मों की मिलीभगत से वित्तीय अनियमितता दर्शाता है। मामले की जांच के लिए निदेशालय स्तर पर कमेटी गठित करने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा उधम सिंह नगर, हरिद्वार, हल्द्वानी शहर, देहरादून शहर और कोटद्वार क्षेत्र में मिड-डे मील योजना की भी जांच कराने को कहा गया।

जनपद स्तरीय कार्यों की निगरानी के लिए महानिदेशक को निर्देश दिए कि निदेशालय स्तर के एक-एक अधिकारी को नोडल अधिकारी नामित किया जाए। ये अधिकारी संबंधित जिलों में जाकर जिलाधिकारी और सीडीओ की अध्यक्षता में योजनाओं की समीक्षा करेंगे और रिपोर्ट शासन को भेजेंगे।

बैठक में सचिव रविनाथ रमन, अपर सचिव नमामि बंसल, महानिदेशक आकांक्षा कोण्डे, निदेशक वंदन गर्ब्याल, विनोद कुमार सिमल्टी, के.एस. रावत, उप निदेशक जे.पी. काला और देहरादून के सीईओ गोविंद राम जायसवाल मौजूद रहे। अन्य जिलों के सीईओ वर्चुअल माध्यम से जुड़े।

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