ओलम्पस हाई में अभिभावक-शिक्षक साझेदारी को सशक्त बनाने हेतु शिक्षक कार्यशाला आयोजित

वियना की मनोचिकित्सक अदिति अरोड़ा ने सिखाए सक्रिय श्रवण व भावनात्मक बुद्धिमत्ता के गुर

देहरादून । ओलम्पस हाई विद्यालय में सोमवार को ‘बेहतर पेरेंटिंग के लिए अभिभावकों को शिक्षित करना’ विषय पर शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को ऐसे व्यावहारिक कौशल प्रदान करना था, जिनके माध्यम से वे अभिभावकों के साथ प्रभावी संवाद स्थापित कर बच्चों के शैक्षणिक, भावनात्मक एवं सामाजिक विकास में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित कर सकें।

कार्यक्रम में विद्यालय के प्रबंध निदेशक डॉ. कुनाल शमशेर मल्ला, प्रधानाचार्या डॉ. अनुराधा पुंडीर मल्ला, उप-प्रधानाचार्या अर्चना, विभिन्न समन्वयकों तथा प्री-प्राइमरी, प्राइमरी, मिडिल एवं सीनियर विंग के समस्त शिक्षकों ने सहभागिता की। कार्यशाला का संचालन सिग्मंड फ्रायड यूनिवर्सिटी, वियना से संबद्ध प्रतिष्ठित मनोचिकित्सक एवं काउंसलर अदिति अरोड़ा ने किया, जिन्होंने अपने व्यापक अनुभव के आधार पर शिक्षकों को अभिभावकों के साथ सकारात्मक संवाद स्थापित करने तथा बच्चों के भावनात्मक विकास में उनकी भूमिका को और प्रभावी बनाने के महत्वपूर्ण पहलुओं से अवगत कराया।

कार्यशाला के दौरान संवादात्मक गतिविधियों, केस स्टडी एवं व्यावहारिक अभ्यासों के माध्यम से शिक्षकों ने सक्रिय श्रवण, सहानुभूतिपूर्ण संवाद, भावनात्मक बुद्धिमत्ता, सकारात्मक अनुशासन, रचनात्मक फीडबैक, मतभेदों के समाधान तथा विद्यालय और परिवार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के प्रभावी तरीकों पर चर्चा की। इस दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि अभिभावकों को केवल हितधारक नहीं, बल्कि बच्चों की शिक्षा यात्रा के महत्वपूर्ण सहयोगी के रूप में देखा जाना चाहिए।

अदिति अरोड़ा ने इस अवसर पर कहा कि अभिभावक बच्चे के प्रथम शिक्षक होते हैं, जबकि विद्यालय उसका विस्तारित परिवार होता है। जब दोनों आपसी विश्वास, संवेदनशीलता और साझा उद्देश्य के साथ मिलकर कार्य करते हैं, तभी बच्चों का सर्वांगीण विकास संभव हो पाता है। प्रबंध निदेशक डॉ. कुनाल शमशेर मल्ला ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षकों को अभिभावकों के साथ प्रभावी संवाद स्थापित करने के लिए सशक्त बनाना एक मजबूत शैक्षिक वातावरण के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि विद्यालय और अभिभावकों के बीच सुदृढ़ साझेदारी ही जिम्मेदार एवं आत्मविश्वासी नागरिकों के निर्माण का आधार है।

प्रधानाचार्या डॉ. अनुराधा पुंडीर मल्ला ने कहा कि आज के शिक्षक केवल ज्ञान प्रदान करने वाले नहीं, बल्कि विद्यालय और परिवार के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका निभाते हैं। उन्होंने प्रभावी अभिभावक संवाद को प्रत्येक शिक्षक की आवश्यक व्यावसायिक दक्षता बताया। कार्यशाला का समापन एक संवादात्मक चिंतन सत्र के साथ हुआ, जिसमें शिक्षकों ने अपने अनुभव साझा किए तथा भविष्य में अभिभावकों के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने के लिए अपनाई जाने वाली रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया।

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