भानियावाला-जॉलीग्रांट-ऋषिकेश फोरलेन में हाथियों के लिए बनेंगे 5 अंडरपास, ₹743 करोड़ की परियोजना में वन्यजीव संरक्षण पर खास फोकस

754 पेड़ों का होगा प्रतिरोपण, ROW घटाकर 23 मीटर करने से बचेगा वन क्षेत्र, बड़कोट-ऋषिकेश रेंज में 5 साल में हो चुकी 29 वन्यजीवों की मौत

देहरादून।  भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) उत्तराखंड में भानियावाला-जॉलीग्रांट-ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन परियोजना (एनएच-07) को सुरक्षित, तेज़ और पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी राजमार्ग के रूप में विकसित कर रहा है। लगभग 20 किलोमीटर लंबी यह परियोजना 743 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से हाइब्रिड एन्युटी मोड के तहत बनाई जा रही है। इससे देहरादून, जॉलीग्रांट एयरपोर्ट और ऋषिकेश के बीच संपर्क और अधिक सुदृढ़ होगा, साथ ही पर्यटन, चारधाम यात्रा तथा राज्य की बढ़ती परिवहन आवश्यकताओं को भी बेहतर आधार मिलेगा।

मौजूदा दो-लेन मार्ग पर वन क्षेत्र से गुजरते हुए प्रतिदिन करीब 18,456 वाहनों का आवागमन हो रहा है, जो लगभग 15,088 पैसेंजर कार यूनिट के बराबर है। पर्यटन, जॉलीग्रांट एयरपोर्ट की बढ़ती आवाजाही और चारधाम यात्रा के चलते भविष्य में यातायात और बढ़ने की आशंका है। मौजूदा मार्ग पर कई तीखे मोड़ हैं और यह घने वन क्षेत्र से होकर गुजरता है, जिससे भारी वाहनों की आवाजाही के कारण जाम व दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। फोरलेन बनने से सड़क की ज्यामिति में सुधार होगा और यात्रा अधिक सुरक्षित होगी।

पर्यावरण पर प्रभाव कम करने के लिए एनएचएआई ने डिजाइन में कई अहम बदलाव किए हैं। सामान्यतः राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए 60 मीटर राइट ऑफ वे तय होता है, लेकिन वन क्षेत्र में इसे घटाकर मात्र 23 मीटर रखा गया है, जिससे सुरक्षा मानकों से समझौता किए बिना पेड़ों की कटाई काफी कम की जा सकेगी। फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक आकलन के आधार पर 754 पेड़ों को प्रतिरोपण के लिए उपयुक्त चिन्हित किया गया है, जिनका प्रतिरोपण आगामी मानसून सीजन में किया जाएगा।

यह परियोजना बड़कोट, ऋषिकेश और थानो वन रेंज जैसे पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों से गुजरती है, इसलिए दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर की तर्ज पर इसमें भी वन्यजीव संरक्षण को खास तवज्जो दी गई है। उत्तराखंड वन विभाग, WWF-India और भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून के तकनीकी परामर्श से परियोजना में एक प्रमुख ब्रिज-कम-एलीफेंट अंडरपास, चार समर्पित एलीफेंट अंडरपास, ग्रीन गाइड हेज, साउंड बैरियर, एंटी-ग्लेयर स्क्रीन, वन्यजीव चेतावनी संकेतक, गति नियंत्रण उपाय और ‘नो हॉर्न’ जोन जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं।

वन विभाग के अभिलेखों के अनुसार मौजूदा दो-लेन मार्ग पर ऋषिकेश और बड़कोट वन रेंज में पिछले पांच वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं में 29 वन्यजीवों की मौत दर्ज की गई है। इसे ध्यान में रखते हुए हाथियों के सुरक्षित आवागमन के लिए करीब 3.5 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड संरचना सहित विशेष एलीफेंट अंडरपास विकसित किए जा रहे हैं।

परियोजना सभी वैधानिक अनुमतियां प्राप्त होने के बाद शुरू की गई है। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने WP (PIL) संख्या 37/2025 की सुनवाई में स्पष्ट किया कि पेड़ों की कटाई पर कोई प्रभावी रोक लागू नहीं है, जिसके बाद राज्य सरकार ने निर्धारित पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों के अधीन पेड़ों की कटाई व प्रतिरोपण की वर्किंग परमिशन दी है। परियोजना पूर्ण होने के बाद देहरादून, जॉलीग्रांट एयरपोर्ट और ऋषिकेश के बीच संपर्क बेहतर होगा, यात्रा समय व जाम में कमी आएगी तथा समर्पित एलीफेंट अंडरपास के जरिए वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित होगी।

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