

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) ने विश्व की सबसे बड़ी डिजिटल स्वास्थ्य अवसंरचनाओं में से एक का निर्माण किया है। इसके अंतर्गत 104 करोड़ से ज्यादा स्वास्थ्य रिकॉर्ड 93 करोड़ से अधिक आभा खातों से जोड़े गए हैं। एबीडीएम ने कागजी कार्रवाई को खत्म कर और इंतजार के समय में कमी लाकर रोगियों को बीमाकर्ताओं, अस्पतालों और डॉक्टरों से एक एकीकृत नेटवर्क से जोड़ दिया है।
डिजिटल स्वास्थ्य अवसंरचना का निर्माण
भारत सबके लिए स्वास्थ्य सुविधा की ओर लगातार बढ़ रहा है, जहाँ हर कोई बिना किसी आर्थिक कठिनाई के गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा सकता है।
भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक मज़बूत डिजिटल आधार की ज़रूरत है। स्वास्थ्य सेवाओं को ज़्यादा आसान, कुशल और सुलभ बनाने के लिए एक मज़बूत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना अनिवार्य है।
एक डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम:
मरीज़ों के रिकॉर्ड को सुरक्षित रूप से रखने में मदद करता है।
लोगों को स्वास्थ्य सेवा और बीमा प्रदाताओं से जोड़ता है।
यह स्वास्थ्य रिकॉर्ड्स को आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाने की सुविधा देता है, जिससे नागरिक देश भर में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन से जुड़े किसी भी स्वास्थ्य केंद्र पर अपने स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड्स को सुरक्षित रूप से देख और शेयर कर सकते हैं।
यह बिना पहचान वाले गोपनीय स्वास्थ्य डेटा तैयार करता है।
इस डेटा का उपयोग स्वास्थ्य योजना और सेवा वितरण में सुधार करने के साथ-साथ भारत के उभरते हुए कृत्रिम मेधा (एआई) इकोसिस्टम को मज़बूत करने के लिए किया जा सकता है। इस तरह की अवसंरचना के होने से बीमारी पर नज़र रखने, निदान और स्वास्थ्य प्रबंधन के क्षेत्र में नए नवाचार की संभावना बनती है।
इसे ध्यान में रखते हुए, भारत सरकार ने एक एकीकृत और नागरिक-केंद्रित राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम विकसित करने के लिए सितंबर 2021 में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) की शुरुआत की।
एक एबीडीएम-सक्षम सॉफ्टवेयर का उपयोग करके, स्वास्थ्य केंद्र आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाते (आभा) से जुड़े डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड बना सकते हैं। इसके अलावा, वे मरीज की सहमति लेने के बाद उनके पिछले रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से देख सकते हैं और मरीज़ की ऐसी मंज़ूरी, जिसे कभी भी वापस लिया जा सके और जो एक तय समय के लिए हो, के ज़रिए डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड का आदान-प्रदान कर सकते हैं।
आभा आधार की तरह एक विशिष्ट पहचान है, जो लोगों को सुरक्षित रूप से व्यापक स्वास्थ्य प्रणाली से जोड़ता है। यह मरीजों को डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँचने में मदद करता है। वे इस एक अंतर-संचालनीय नेटवर्क के माध्यम से अपने पूरे मेडिकल इतिहास को सुरक्षित रखते हुए बीमा कंपनियों, स्वास्थ्य सुविधाओं, डॉक्टरों और अन्य सेवाओं से जुड़ सकते हैं।
मई 2026 में हासिल की गई एक बड़ी उपलब्धि के तहत, अब 104 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड 93 करोड़ से भी ज़्यादा आभा खातों से जुड़ चुके हैं। यह एक व्यवस्थित डिजिटल सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र की दिशा में अहम प्रगति है।
एबीडीएम: एक संपूर्ण डिजिटल स्वास्थ्य तंत्र
आभा के अलावा, एबीडीएम एक पूर्ण रूप से विकसित डिजिटल स्वास्थ्य तंत्र है। यह मरीजों को उनके मेडिकल रिकॉर्ड से जोड़ता है, बीमा कंपनियों को अस्पतालों से जोड़ता है, और सभी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को एक ही नेटवर्क पर लाता है।
आभा संख्या: 14 अंकों की एक विशिष्ट स्वास्थ्य पहचान या संख्या जो आपकी सहमति से विभिन्न अस्पतालों, लैब, बीमा कंपनियों और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में आपके सभी स्वास्थ्य रिकॉर्ड को जोड़ती है।
स्वास्थ्य व्यावसायिक पंजीयन: देश के सभी स्वास्थ्य पेशेवर डॉक्टरों से लेकर आयुष चिकित्सकों तक का पंजीयन, जो सत्यापित होते हैं और डिजिटल रूप से जुड़े हुए हैं।
स्वास्थ्य सुविधा रजिस्ट्री: सभी सरकारी और निजी स्वास्थ्य सुविधाओं—जैसे अस्पतालों, क्लीनिकों, लैब और फार्मेसियों का एक राष्ट्रीय पंजीकरण, जो सभी एक ही स्थान पर उपलब्ध हैं।
यूनिफाइड हेल्थ इंटरफेस: स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक खुला नेटवर्क—जैसे स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के लिए यूपीआई। इसके ज़रिए किसी भी ऐप से अपॉइंटमेंट बुक करें, डॉक्टरों से परामर्श लें और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं का पता लगा सकते हैं।
आरोग्य सेतु 2.0: यह डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं और एक व्यक्तिगत स्वास्थ्य रिकॉर्ड (पीएचआर) के लिए एक एकीकृत माध्यम के रूप में कार्य करता है, जिससे देश भर में डिजिटल स्वास्थ्य को अपनाने की रफ़्तार को तेज़ किया जा रहा है।
निपटान की उबाऊ और थकाऊ अवधि की जगह मरीजों के लिए एक मददगार समाधान साबित हो सकता है। यह दावों की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और गैर-संचारी रोगों से पीड़ित उन मरीजों के अनुकूल भी बना सकता है, जिन्हें नियमित और निरंतर इलाज की आवश्यकता होती है।
एनएचसीएक्स भुगतानकर्ताओं, स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं, लाभार्थियों, नियामकों और पर्यवेक्षकों के बीच दावों से संबंधित सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए एक डिजिटल मार्ग बनाता है।
इस प्रणाली के कई लाभ हैं:
यह निर्णयों में तेजी लाती है, अस्पताल से छुट्टी मिलने के समय को कम करती है, और अस्पताल के प्रशासनिक खर्चों में कटौती करती है।
इसके परिणामस्वरूप बीमा दावों का निपटान अधिक तेजी से होता है।
मरीज़ अपने फ़ायदे, मेडिकल हिस्ट्री और मिलने वाली सुविधाओं को एक ही जगह पर देख सकते हैं।
स्वास्थ्य सेवा प्रदाता (डॉक्टर/अस्पताल) मरीज की सहमति से उसके इलाज का पूरा इतिहास देख सकते हैं, जिससे बार-बार एक जैसे टेस्ट कराने की जरूरत नहीं पड़ती और इलाज से जुड़े फ़ैसले बेहतर होते हैं।
बीमा कंपनियाँ बेहतर फ़ैसले ले सकती हैं और नए बीमा कर सकती हैं।
चूंकि मरीज एक ही प्लेटफॉर्म पर अपने हर दावे को ट्रैक कर सकते हैं, इसलिए उनकी आर्थिक सुरक्षा, योजना और सेहत से जुड़े नतीजों में सुधार होता है।
एकीकृत स्वास्थ्य इंटरफ़ेस (यूएचआई)
परंपरागत रूप से, मरीज़ और स्वास्थ्य सेवा प्रदाता तभी आपस में बातचीत कर सकते थे जब वे एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहे हों। यूएचआई इस बाधा को दूर करता है, जिससे यूएचआई-सक्षम एप्लिकेशन का उपयोग करने वाला कोई भी मरीज़, प्रदाता द्वारा उपयोग किए जा रहे एप्लिकेशन की परवाह किए बिना, किसी भी सत्यापित स्वास्थ्य सेवा प्रदाता को खोज सकता है, उससे जुड़ सकता है और उसके साथ लेन-देन कर सकता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) द्वारा संचालित एक सामान्य गेटवे के माध्यम से अनुरोध भेजे जाते हैं, जो मरीज़ों को उनके आभा विवरण का उपयोग करके प्रमाणित करता है, जबकि स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं और सुविधाओं का सत्यापन एचपीआर और एचएफआर रजिस्टरों के माध्यम से किया जाता है।
यूएचआई चार सिद्धांतों पर बनाया गया है:
अंतरसंचालनीयता
किसी भी आकार के प्रदाताओं के लिए उचित खोज योग्यता
केवल प्रमाणित डॉक्टरों और सुविधाओं का सत्यापन
ऐसे खुले नियम और तकनीकी मानक, जिन पर कोई भी डेवलपर नया एप्लिकेशन बना सके।
यूएचआई प्लेटफॉर्म पर वर्तमान में पांच सेवाएं उपलब्ध हैं:
ब्लड बैंक की खोज
पीएम जन आरोग्य योजना के तहत अस्पतालों की खोज — यह योजना समाज के गरीब तबके को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा प्रदान करती है।
जन औषधि केंद्रों की खोज — ये ऐसे केंद्र हैं जहां जेनेरिक दवाएं बाजार मूल्य से 50-90त्न तक कम कीमतों पर उपलब्ध होती हैं।
एम्बुलेंस बुकिंग
डॉक्टर से परामर्श
इन रोजमर्रा के कामों को आसान करने के अलावा, यूएचआई का एक बहुत बड़ा उद्देश्य और भी है। यह एबीडीएम में उत्पन्न डेटा का उपयोग सार्वजनिक स्वास्थ्य अनुसंधान और नीति को सशक्त बनाने के लिए करता है।
भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य डेटा और एआई अभियान का केंद्र बिंदु है एबीडीएम
‘आभाÓ और इससे जुड़े स्वास्थ्य रिकॉर्ड सार्वजनिक स्वास्थ्य अनुसंधान और नीति निर्धारण के लिए तेजी से एक मूल्यवान संसाधन के रूप में उभर रहे हैं। एबीडीएम पर मौजूद स्वास्थ्य डेटा पूरी तरह से गोपनीय होता है। यह डेटा सरकार को बीमारियों के फैलने का पता लगाने, सार्वजनिक स्वास्थ्य के रुझानों की निगरानी करने और अधिक सटीक व लक्षित स्वास्थ्य कार्यक्रम तैयार करने में भी मदद करता है।
गोपनीयता पर आधारित संरचना
जब मरीज एबीडीएम पर अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड अपलोड करते हैं, तो वह डेटा उसी के पास रहता है जिसने उसे तैयार किया है — जैसे कि संबंधित अस्पताल, लैब या बीमा कंपनी। इस पूरे डेटा को सुरक्षित रखने के लिए केंद्र सरकार का कोई केंद्रीय सर्वर नहीं है। रिकॉर्ड केवल तभी एबीडीएम नेटवर्क के भीतर साझा किए जाते हैं जब मरीज इसके लिए अपनी सहमति देता है।
ऐप्स और प्लेटफॉर्म सीधे एबीडीएम से नहीं जुड़ सकते। प्रत्येक नए ऐप को सबसे पहले एक “सैंडबॉक्स” में परखा जाना अनिवार्य है, जो कि वास्तविक सिस्टम का एक सुरक्षित और सिम्युलेटेड (काल्पनिक) संस्करण होता है। इसके साथ ही, लाइव होने से पहले ऐप को एक सुरक्षा ऑडिट से भी गुजरना पड़ता है। यह ऑडिट यह जांच करता है कि ऐप मरीजों के डेटा को कैसे संभालता है और उसकी सुरक्षा कैसे करता है।
स्वास्थ्य सेवा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को एकीकृत करने के लिए भी यह डेटा बेहद महत्वपूर्ण है। फरवरी 2026 में, सरकार ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में ‘साहीÓ (एसएएचआई)-भारत के लिए स्वास्थ्य सेवा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रणनीति) और ‘बोधÓ (बीओडीएच)-स्वास्थ्य एआई के लिए बेंचमार्किंग ओपन डेटा प्लेटफॉर्म) को शुरू किया।
एसएएचआई ‘साहीÓ- नैतिकता , जवाबदेही, सुरक्षा और सहयोग पर एक व्यवस्थित मार्गदर्शन प्रदान करता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि स्वास्थ्य सेवा में एआई का उपयोग पारदर्शी, समावेशी और जन-केंद्रित बना रहे।
बीओडीएच ‘बोधÓ- एक सुरक्षित और संबद्ध इकोसिस्टम है, जहाँ डेवलपर्स मरीजों के मूल डेटा को देखे बिना ऑन-साइट ही अपने एआई मॉडल को प्रशिक्षित कर सकते हैं और पूर्ण गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए केवल परिष्कृत मॉडल वेट्स को ही वापस भेजते हैं।
ये सभी मिलकर भारत की उस प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं, जिसका लक्ष्य एक भरोसेमंद, समावेशी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी स्वास्थ्य एआई इकोसिस्टम बनाना है — एक ऐसा इकोसिस्टम जो नवाचार, ज़िम्मेदारी और जनता के भरोसे पर आधारित हो।
डिजिटलीकरण के माध्यम से सबके लिए स्वास्थ्य सेवा
एबीडीएम दुनिया के सबसे महत्वाकांक्षी और सफल डिजिटल स्वास्थ्य कार्यक्रमों में से एक है। यह पहले से ही परिणाम दे रहा है। लाखों मरीजों के लिए प्रतीक्षा समय कम हुआ, कागज़ रहित रिकॉर्ड, दावों का तेज़ी से निपटान और स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुँच देखी गई।
93 करोड़ से अधिक आभा खातों से जुड़े 104 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड के साथ, एबीडीएम ने समय के साथ मरीजों के विस्तृत और डिजिटल मेडिकल इतिहास को तैयार करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव हासिल कर लिया है। सरकार का लक्ष्य भारत भर के सभी मरीजों और स्वास्थ्य सुविधाएँ देने के लिए एबीडीएम नेटवर्क का विस्तार करना है, ताकि हर नागरिक के लिए पूरी तरह से डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड का लक्ष्य हासिल किया जा सके।

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