

दून में सबसे ज्यादा जंगल की बलि: 6% क्षेत्रफल वाले जिले में हुआ 47% वन भूमि हस्तांतरण
देहरादून। पिछले 25 वर्षों में उत्तराखंड में विकास के नाम पर बड़े पैमाने पर जंगलों की कटाई हुई है। RTI से मिली जानकारी के अनुसार राज्य में सड़क, खन और अन्य परियोजनाओं के लिए 46 हजार हेक्टेयर से अधिक वन भूमि हस्तांतरित की गई है। इसमें सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अकेले देहरादून जिले में ही 47 फीसदी वन भूमि का हस्तांतरण हुआ है।
जबकि राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल में देहरादून की हिस्सेदारी सिर्फ 6 फीसदी है। आंकड़े बताते हैं कि औसतन हर दिन करीब 5 हेक्टेयर वन भूमि विकास परियोजनाओं के लिए दी गई।
पर्यावरणविद अनूप नौटियाल ने RTI के हवाले से यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि दून घाटी पहले ही 1980 के दशक में चूना पत्थर खन के कारण गंभीर पर्यावरणीय क्षति झेल चुकी है। इसी वजह से वर्ष 1989 में इसे देश के शुरुआती पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल किया गया था।
श्री नौटियाल ने कहा कि तेजी से बढ़ते वन भूमि हस्तांतरण के कारण दून घाटी अब “विकास और पर्यावरण संरक्षण” के बीच संतुलन की सबसे बड़ी चुनौती का सामना कर रही है। लगातार जंगल कटने से भू-स्खलन, जल संकट और जैव विविधता पर खतरा बढ़ रहा है।
राज्य में कुल 46 हजार हेक्टेयर से ज्यादा वन भूमि डायवर्ट हुई, जिसमें से लगभग 21.6 हजार हेक्टेयर अकेले देहरादून में है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रफ्तार रही तो आने वाले समय में दून की पारिस्थितिकी को और बड़ा नुकसान हो सकता है।
पर्यावरणविदों ने सरकार से मांग की है कि विकास परियोजनाओं को मंजूरी देते समय पर्यावरणीय प्रभाव का गहन मूल्यांकन किया जाए और वैकल्पिक जमीन की तलाश की जाए, ताकि दून घाटी के बचे हुए जंगल बचाए जा सकें।

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