

देहरादून। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के अंतर्गत लंबित मामलों को लेकर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, भारत सरकार के निदेशक उत्तम प्रकाश ने गुरुवार को विकास भवन सभागार, देहरादून में अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की। बैठक का मुख्य उद्देश्य लंबित प्रकरणों की प्रगति परखना और पीड़ितों को समयबद्ध न्याय के साथ आर्थिक सहायता सुनिश्चित कराना था।
बैठक में जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपॉकर घिल्डियाल, पुलिस उपाधीक्षक जितेन्द्र चौधरी, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी नरेश धारकोटी और लेखाकार उत्तम सिंहसहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
समीक्षा के दौरान निदेशक श्री उत्तम प्रकाश ने कहा कि SC/ST वर्ग के हितों की रक्षा और अत्याचार निवारण अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी लंबित मामलों का निस्तारण गुणवत्ता के साथ शीघ्र किया जाए।
बैठक में कई अहम निर्देश जारी किए गए। निदेशक ने कहा कि परगना स्तर पर सतर्कता एवं मॉनिटरिंग समिति का गठन तुरंत किया जाए और उसकी बैठक भी शीघ्र आयोजित हो। पुलिस जांच से जुड़े ऐसे मामले जो 60 दिनों से अधिक समय से लंबित हैं, उन पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिनियम के अनुसार हर केस की जांच 60 दिन के भीतर अनिवार्य रूप से पूरी होनी चाहिए।
भूमि से जुड़े लंबित प्रकरणों की सूची जिलाधिकारी को सौंपकर 10 दिन के भीतर प्रगति रिपोर्ट मांगी गई। वहीं पीड़ितों को आर्थिक सहायता मिलने में हो रहे विलंब पर भी चिंता जताई गई। समाज कल्याण विभाग को निदेशालय से समन्वय कर बजट उपलब्ध कराते हुए तुरंत सहायता राशि जारी करने के निर्देश दिए गए।
एक प्रकरण में बैंक खाता और जाति प्रमाण-पत्र न होने के कारण सहायता रुकी थी। इस पर पुलिस उपाधीक्षक को निर्देशित किया गया कि संबंधित लाभार्थी के दस्तावेज 3 दिन के भीतर समाज कल्याण विभाग को उपलब्ध कराए जाएं ताकि भुगतान में देरी न हो।
बैठक के अंत में श्री उत्तम प्रकाश ने सभी विभागों से आपसी समन्वय के साथ काम करने और अधिनियम के प्रावधानों का कड़ाई से पालन करते हुए पीड़ितों को समय पर न्याय और राहत देने को कहा।

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